महाराष्ट्र !  सरकार गठन हेतु कांग्रेस-राकांपा ने शिवसेना के साथ गठबंधन की तैयार कर रही रूपरेखा

नयी दिल्ली, 21 नवम्बर 2019। कांग्रेस और राकांपा शिवसेना के साथ महाराष्ट्र में सरकार गठन के मुद्दे पर आज और करीब आये। कांग्रेस-राकांपा सत्ता साझेदारी के स्वरूप और न्यूनतम साझा कार्यक्रम को अंतिम रूप दे दिया है।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने महाराष्ट्र में राजनीतिक स्थिति पर विस्तृत विचार विमर्श के बाद राज्य में शिवसेना के साथ गठबंधन को अपनी सहमति प्रदान कर दी है।
पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली बैठक के बाद कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार तक महाराष्ट्र में सरकार गठन पर अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है।
बताते चलें कि कांग्रेस और राकांपा के वरिष्ठ नेताओं ने कल बैठक की थी और आज दोनों पार्टियों के कई शीर्ष नेताओं ने दोपहर राकांपा प्रमुख शरद पवार के आवास पर उनसे मुलाकात की थी। इस बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, जयराम रमेश और मल्लिकार्जुन खड़गे तो राकांपा के प्रफुल्ल पटेल, सुप्रिया सुले, अजीत पवार, जयंत पाटिल और नवाब मलिक शामिल थे। इससे पूर्व शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने विश्वास जताया कि दोनों पार्टियां कांग्रेस के साथ एक या दो दिन में सरकार गठन को लेकर निर्णय पर पहुंच जायेंगी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तीनों दल राज्य में सत्ता गठन को लेकर कल औपचारिक घोषणा कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि भाजपा और शिवसेना ने महाराष्ट्र में गत 21 अक्टूबर को सम्पन्न विधानसभा चुनाव एक साथ मिलकर लड़ा था और दोनों दलों ने 288 सदस्यीय सदन में क्रमश: 105 और 56 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत का आंकड़ा भी हासिल कर लिया था। इस चुनाव में कांग्रेस और राकांपा ने क्रमश: 44 और 54 सीटों पर जीत दर्ज की थी। शिवसेना न भाजपा के साथ सरकार बनाने के लिए नयी मांग रख दी जिसे भाजपा ने पूरी तरह नकार दिया और राज्यपाल को सरकार न बनाने की चिट्ठी सौंप दी। राज्यपाल ने शिव सेना व राकांपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया और समय से किसी पार्टी के दावा पेश न करने पर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी, जिसके चलते राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। इसके उपरांत किसी भी कीमत पर मुख्यमंत्री पद हासिल करने की महत्वाकांक्षा के लिए शिवसेना ने कांग्रेस-राकांपा गठबंधन से बातचीत शुरू की थी जो सम्भवतः अंतिम दौर में है। पता चला है कि तीनों पार्टियों में मंत्री पद व विभागों को लेकर अभी तक सहमति नहीं बन पायी है।


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