गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में बढ़ी बेचैनी
तटवर्ती क्षेत्रों को आगोश में लेने को बेताब है गंगा
गाज़ीपुर। अवर्षण, भयंकर तपन और गर्मी से जूझ रहे किसानों और जनमानस में सावनी फुहार ने जहां नवजीवन का संचार किया वहीं तलहटी में समायी गंगा नदी का सुखता पानी भी अठखेलियां करने लगा है।
उल्लेखनीय है कि जून और जुलाई माह की भयंकर गर्मी ने लोगों को बेचैन कर दिया था। बरसात न होने से खेती में जूटे किसानों के माथे पर बल पड़े थे और अपनी धान की सुखती नर्सरी को देखकर सारे किसान परिवार अपनी खेती को लेकर बेचैन और चिन्तित रहे। खेती के लिए आषाढ़ माह की बारिश खेतों को नया जीवन देती है लेकिन मामूली बरसात के साथ पूरा माह बीत गया। इस वर्ष भयंकर गर्मी और सूखे की मार झेल रहे लोगों को आधा सावन बीतने के बाद भी विशेष राहत नहीं मिली। सावन के माह में निस्तेज पड़े खेतों में धूल उड़ती रही और प्राणी जन उमस और गर्मी से परेशान रहे। उसके बाद रह रह कर हो रही बरसात ने धरती, पशु-पक्षी, खेत और आमजन को अपनी बूंदों से सरोबार किया है और अब जाकर खेतों में पानी दिखने लगा है लेकिन अब तक गर्मी से राहत नहीं मिली है पर पहाड़ी इलाकों में होने वाली बरसात से जिले में गंगा नदी का जलस्तर अब बढ़ने लगा है। गंगा नदी का जलस्तर अब बढ़ाव पर है। इससे नदी किनारे बसेरा बनाए लोगों व समीपवर्ती बस्तियों के निवासियों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरने लगी हैं। पिछले हफ्ते बढ़ाव की ओर अग्रसर गंगा नदी शनिवार 15 अगस्त को स्थिर रहीं और सुबह आठ बजे जलस्तर 56.860 मीटर रहा। रविवार 16 अगस्त को गंगा बढाव पर रहीं और सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 57.070 मीटर मापा गया।
सोमवार 17 अगस्त को भी गंगा का जलस्तर बढता रहा। सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 58.150 मीटर दर्ज किया गया और जलस्तर पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ता पाया गया। यदि बढ़ाव की यही स्थिति बनी रही तो एक दो दिन में जलस्तर जिले में गंगा के निर्धारित सामान्य जलस्तर 59.906 मीटर की सीमा तक पहुंच जायेगा।
बताते चलें कि जिले में गंगा के जलस्तर की सीमा निर्धारित है। इसके अनुसार, सामान्य जलस्तर 59.906 मीटर, चेतावनी बिंदु 62.100 मीटर, खतरा बिन्दु 63.105 मीटर तथा बाढ़ का उच्च स्तर 65.220 मीटर है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.530 मीटर, वर्ष 2021 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.680 मीटर, वर्ष 2022 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.390 मीटर, वर्ष 2023 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 61.700 मीटर तथा वर्ष 2025 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.690 मीटर रहाl
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