सशक्त भारत के निर्माण के लिए विमर्शणीय है जनांदोलनों का इतिहास :  प्रो. अमरनाथ राय

भारतीय जनांदोलनों के महानायक थे महात्मा गाँधी :  प्रो. सतीश राय

गाजीपुर। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित तथा ईश्वरशरण पीजी कालेज, प्रयागराज एवं स्वामी सहजानन्द पीजी कालेज, गाजीपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ”1942 की जनक्रांति और गाजीपुर जनपद में प्रतिरोध का लोकस्वरूप” विषयक द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का ससमारोह सम्पन्न हुई। 

          समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. अमरनाथ राय ने अपने सम्बोधन में युवा पीढ़ी को अपने क्षेत्रीय जनान्दोलन के गौरवशाली विरासत से परिचित कराने की आवश्यकता पर बल दिया।

           विशिष्ट अतिथि प्रो. मालविका रंजन ने इतिहासविदों के माध्यम से 1942 से संबद्ध जनांदोलन में लोक प्रतिरोध को स्पष्ट करने का प्रयास किया। सत्र के अध्यक्ष प्रो. सतीश राय, काशी विद्यापीठ, वाराणसी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि स्वाधीनता आंदोलन का उत्तरार्द्ध जनांदोलनों का इतिहास है, जिसके महानायक महात्मा गाँधी थे, जो लोक के चिर प्रेरणास्रोत रहे। उन्होंने गाँधी को भारतीय लोक-प्रतिरोधी आंदोलनों का सफल नायक बताया। डॉ. अखिलेश त्रिपाठी ने संगोष्ठी के समस्त सत्रों में व्यक्त सम्पूर्ण व्याख्यानों का सार-संक्षेपण प्रस्तुत किया।

    इसके पूर्व, स्वागत उद्बोधन स्वामी सहजानन्द महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. वीके राय ने किया।            समापन सत्र के पूर्व संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में डॉ. अशोक सोनकर, बीएचयू ने अपने वक्तव्य में गाजीपुर के प्रतिरोधी स्वरूप का विवेचन किया तथा हिमांशु त्रिपाठी, अमित कुमार, आलोक कुमार, अजीत कुमार वाजपेयी आदि दर्जनों शोधार्थियों ने सारगर्भित शोधपत्रों की प्रस्तुति की। इस संगोष्ठी के संयोजक डॉ. नरेंद्र सिंह, ईश्वर शरण महाविद्यालय , प्रयागराज रहे। ईश्वर शरण महाविद्यालय प्रयागराज के प्राचार्य प्रो. आंनद शंकर सिंह ने संगोष्ठी की सफलता के लिए समस्त प्रबुद्धजन वक्ताओं, शिक्षकों, शोधार्थियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अजय राय व संचालन डॉ. अमरजीत राम ने किया। 

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