धोखेबाजी का खेल, शिक्षा विभाग स्वयं में फेल

दूसरों को शिक्षित करने वाला शिक्षक स्वयं अशिक्षित


इण्टर फेल धोखेबाज इण्टर कालेज में बन गया शिक्षक 

गाजीपुर। जिले में शिक्षा विभाग में एक ऐसे फर्जीवाड़ा की पोल खुली है जिसमें इन्टरमीडिएट फेल व्यक्ति इण्टर कालेज में एलटी ग्रेड में शिक्षक की नौकरी करता रहा। शिक्षा अधिकारी, विद्यालय के प्रबन्धक और उस धोखेबाज ने मिलकर कूट रचित कागजातों के आधार पर विद्यालय में नौकरी  कर ली और विद्यार्थियों को पढ़ाता रहा। अब फ्राड का पर्दाफाश होने पर उस मामले से जूड़े लोग जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं। 

            यह आरोप लगाया है जिले के मरदह क्षेत्र के बरही गांव निवासी अंगद सिंह यादव पुत्र स्व.सर्वदेव सिंह यादव ने। उन्होंने बाकायदे हलफनामा देकर, फर्जीवाड़े से जूड़े सारे कागजातों के साथ उत्तर प्रदेश शासन तथा अपर सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी को प्रेषित कर दोषी शिक्षक तथा इस मामले में लिप्त लोगों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही की मांग उठाई है। 

    उन्होंने कहा कि यथोचित कार्रवाई न करने तथा आरटीआई में मांगी गयी सूचनाएं उपलब्ध न कराने पर अंगद यादव ने राज्य सूचना आयोग लखनऊ का दरवाजा खटखटाया और तथ्यों सहित अपील दाखिल की। आयोग के विद्वान न्यायाधीश सुधीर कुमार सिंह ने अपील संख्या एस -2 /0344/ए2025 में जिला विद्यालय निरीक्षक गाज़ीपुर को आयोग के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। इसके बावजूद जिला विद्यालय निरीक्षक गाज़ीपुर द्वारा सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। तब प्रतिवादी जिला विद्यालय निरीक्षक गाज़ीपुर द्वारा अपीलकर्ता को सूचनाएं न उपलब्ध कराने पर उनके विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1) के तहत पच्चीस हजार रुपए का अर्थदण्ड भी अधिरोपित किया तथा निबन्धक उत्तर प्रदेश सूचना आयोग को निर्देशित किया कि जन सूचना अधिकारी कार्यालय जिला विद्यालय निरीक्षक गाज़ीपुर के विरुद्ध आरोपित अर्थदण्ड पच्चीस हजार रुपए की वसूली उनके वेतन से दो समान किस्तों में कराया जाना सुनिश्चित करें तथा वसूली की गयी धनराशि निर्धारित लेखा शीर्ष में जमा कराई जाय और अनुपालन आख्या उपलब्ध कराई जाय।

      शिकायतकर्ता अंगद यादव के अनुसार, आरोपी कोमल सिंह यादव ने वर्ष 1988 में पीएन इण्टर कालेज मरदह गाज़ीपुर से इण्टर की परीक्षा दी जिसमें व अनुत्तीर्ण रहे। इसके उपरांत कोमल सिंह यादव ने वर्ष 1989 में पीएन इण्टर कालेज मरदह गाज़ीपुर से इण्टर की परीक्षा में संस्थागत और जनता आदर्श इण्टर कालेज लहुरापुर से व्यक्तिगत छात्र के रूप में आवेदन किया। परीक्षाफल गजट के अनुसार वे संस्थागत परीक्षा में अनुपस्थित (डब्ल्यूई) तथा व्यक्तिगत परीक्षा में (डब्ल्यूई) दर्ज है। इसके बाद कोमल सिंह यादव ने सत्र 1996-97 में शांति निकेतन इण्टर कालेज बरही में इण्टर में प्रवेश लिया और 1997 में इण्टर की परीक्षा द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने श्री राधा रमण महाविद्यालय आदर्शों विद्यापीठ रुहीपुर गाज़ीपुर में संस्थागत छात्र के रूप में प्रवेश लिया।

      इसके साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षक ने आरटीआई में सूचना दी थी कि एक सितम्बर 1993 से शांति निकेतन इण्टर कालेज बरही में प्रबन्धक द्वारा कोमल सिंह यादव एलटी ग्रेड में शिक्षक नियुक्त हैं और उनकी योग्यता बीए, बी-एड दर्शायी गयी है। 

      शिकायतकर्ता अंगद सिंह यादव ने माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन, अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सहित अन्य अधिकारियों को सारे अभिलेख उपलब्ध कराते हुए कहा कि कोमल सिंह यादव ने वर्ष 1997 में इण्टर की परीक्षा पास की जबकि इससे पहले ही वह फर्जी आधार पर 1993 में कैसे शिक्षक बनाये गये, इसकी वास्तविक रूप से जांच कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच और कार्यवाही नहीं हुई तो इसका सत्य उजागर करने के लिए वह माननीय उच्च न्यायालय में भी वाद दाखिल करेंगे ताकि शिक्षा विभाग में फैले भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो सके और दोषियों को दण्ड मिल सके।

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