रेल संरक्षा आयुक्त के निरीक्षण के बाद 120 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ी सी आर एस स्पेशल
दुल्लहपुर-सादात रेल खण्ड पर ट्रायल सम्पन्न
वाराणसी। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल के भटनी-औड़िहार रेलवे लाइन (117 किमी.) के दोहरीकरण परियोजना के अन्तर्गत दुल्लहपुर – सादात रेलवे स्टेशनों के मध्य दोहरीकरण का कार्य पूर्ण हो चुका है।
इसी क्रम में दुल्लहपुर-सादात (18.51 किमी) रेल खण्ड का विद्युतीकृत लाइनों के साथ दोहरीकरण कार्य पूर्ण होने के उपरांत रेल संरक्षा आयुक्त, उत्तर पूर्व सर्किल प्रणजीव सक्सेना द्वारा संरक्षा निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय एवं वाराणसी मंडल के वरिष्ठ रेल अधिकारीगण उपस्थित रहे।
रेल संरक्षा आयुक्त प्रणजीव सक्सेना ने बुधवार को दुल्लहपुर स्टेशन यार्ड में दोहरीकरण के निमित्त किये गये निर्माण, नवनिर्मित पैसेंजर प्लेटफार्म, लूप लाइन हेतु डाले गये नये ट्रैक, टर्नआउट, स्विच एक्सटेंसन जॉइंट्स, माईनर ब्रिज एवं समपार फाटक सं-11 एवं 13 पर किये गये तकनीकी कार्यों समेत यार्ड के नये ट्रैक फार्मेशन का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने दुल्लहपुर रेलवे स्टेशन पर तकनीकी दस्तावेजों, स्टेशन वर्किंग रुल, नये सर्किट डाईग्राम, फार्मेशन एवं अर्थवर्क कार्यो के निष्पादन रिकार्ड, पॉइंट्स क्रासिंग, लॉन्ग रेल वेल्डिंग एवं अल्ट्रासाउंड जाँच रिकार्ड तथा सिगनलिंग से जुड़े रिकार्डो की भी जाँच की।
बताते चलें कि इसके पूर्व 25 मार्च को रेल संरक्षा अधिकारी ने मोटर ट्राली से सादात- जखनियां- दुल्लहपुर ब्लॉक सेक्शन का गहन निरीक्षण कर संरक्षा के सभी मानकों का परीक्षण किया था।
रेल संरक्षा आयुक्त द्वारा दुल्लहपुर-सादात (18.51 किमी) रेल खण्ड के तकनीकी जाँच एवं संरक्षा निरीक्षण के पश्चात दुल्लहपुर से सादात तक सी आर एस स्पेशल से स्पीड ट्रायल किया गया। सी आर एस स्पेशल द्वारा अधिकतम 120 किमी/घंटे की रफ्तार से सफलतापूर्वक स्पीड ट्रायल पूरा किया ।*
ज्ञातव्य हो की भटनी-औड़िहार रेल खण्ड (117 किमी.) दोहरीकरण परियोजना के अन्तर्गत सादात-दुल्लहपुर (18.51 किमी.) के विद्युतीकृत लाइनों के साथ दोहरीकरण के साथ कुल 74 किमी का कार्य पूर्ण हो जाने से पर भटनी-औड़िहार रेल खण्ड का अधिकांश भाग दोहरीकृत हो गया है। शेष 43 किमी रेल खण्ड में पिविकोल-बेल्थरा रोड एवं मऊ-दुल्लहपुर सेक्शन का दोहरीकरण प्रगति पर है। इस दोहरी लाइन का कार्य पूर्ण हो जाने पर इस खण्ड पर पड़ने वाला यातायात का अत्यधिक दबाव कम हो जायेगा।
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