ख्याति लब्ध साहित्यकार हृदयेश जी को उनकी 27वीं पुण्य तिथि पर दी गयी श्रद्धांजलि

गाजीपुर। ख्यातिलब्ध साहित्यकार, पत्रकार एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व श्रीकृष्ण राय ‘हृदयेश’ की 27वीं पुण्य तिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। नगर के नखास स्थित हृदयेश पथ गौतम आश्रम में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। 


       वक्ताओं ने हृदयेश जी के व्यक्तित्व व कृतित्व की चर्चा करते हुए उन्हें राष्ट्रभक्त स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए उनके जीवन से सीख लेनने की प्रेरणा दी। हृदयेशजी के कनिष्ठ पुत्र सेवानिवृत कर्नल ब्रह्मानंद राय ने कहा कि अपने मामा शेरपुर निवासी छेदी लाल की प्रेरणा से बाबूजी 16 वर्ष की आयु में ही स्वतंत्रता आन्दोलन से जूड़ गये थे।

    सामाजिक चेतना के सरोकार व बहुमुखी प्रतिभा के धनी हृदयेश जी ने वर्ष 1932 मे 22 वर्ष की अवस्था मे पहला काव्य पुस्तक युवक प्रकाशित किया था। उनकी रचित भोजपुरी सतसई भोजपुरी भाषा की मानक कृति है। वहीं ’सत्यासत्य’ महाभारत पर आधारित है तो ‘नवदीप’ रामायण के पात्रों को लेकर आधुनिक परिप्रेक्ष्य में देखने का प्रयास है। उन्होंने ’शंखपुष्पी’ में वेदकालीन व्यवस्था का चित्रण किया है। ’लहर लहर लहराए गंगा’ खंडकाव्य में गंगा की दुर्दशा और मानव की स्वार्थी प्रवृत्ति का चित्रण है और ’ संजीवनी’ खंडकाव्य में युवा नेतृत्व की बात कही गई है। हृदयेश जी हिंदी,अंग्रेजी और उर्दू के कई समाचार पत्रों के लेखक व संवाददाता के रुप में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने 1949 से लोक सेवक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन भी किया। गिरिजा राय ने कहा की पिताजी समय से बहुत पांबद थे उनका हर काम समय देखकर होता था। समय पूछ कर ही वह  इस लोक को अलविदा कह गये। भले ही अब वे हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी स्मृतियां आज भी हमारा मार्गदर्शन करती हैं।

            इस अवसर पर उपस्थित परिजनों ने भी उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी, जिसमें प्राची राय, हिंमाशु, कार्तिक, आयुषी, कौस्तुभ आदि उपस्थित रहे।

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