सत्र न्यायालय द्वारा निस्तारित 53 वादों में से दस में सजा और 38 में अभियुक्त रिहा
गाजीपुर। अभियोजन की समीक्षा बैठक अपर जिलाधिकारी वि./रा. वेद सिंह चौहान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुई। बताया गया कि सत्र न्यायालय में कुल 53 वाद निस्तारित हुए जिसमें से दस वाद में सजा हुई, 38 वाद में अभियुक्त रिहा हुए तथा 33 वाद में अभियुक्त पक्षदोहिता के कारण तथा पांच वाद में अभियुक्त गुण-दोष के आधार पर रिहा हुए। वहीं एक वाद में अपील प्रस्तावित की गयी। अन्य अधिनियम के अन्तर्गत 05 वाद निस्तारित हुए, जिसमें से 05 वाद में अभियुक्त को सजा हुआ।
बताया गया कि अभियोजन संवर्ग अन्तर्गत कुल 438 वारण्ट निर्गत हुए जिसके सापेक्ष 243 वारण्ट तामिल हुए तथा 151 गवाह उपस्थित हुए जिसमें से 141 गवाह परीक्षित हुए तथा 10 गवाह अपरीक्षित हुए क्योंकि पीठासीन अधिकारी अवकाश पर रहे तथा अधिवक्तागण न्यायिक कार्य से विरत रहे। सत्र न्यायालयों में सम्मन/वारण्ट/तलब गवाहों हेतु कुल 738 सम्मन निर्गत हुए जिसके सापेक्ष 533 तामिल हुए। तामिला के सापेक्ष कुल 304 गवाह उपस्थित हुए। उपस्थित गवाहों के सापेक्ष कुल 277 गवाह परीक्षित हुए तथा 27 गवाह अधिवक्ता के हड़ताल तथा पी.ओ. के अवकाश के कारण परीक्षित नहीं हो सके। वहीं कुल 58 जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल हुए जिसमें 01 जमानत स्वीकृत हुए तथा 57 जमानत प्रार्थना पत्र अस्वीकृत हुए।
समीक्षा में सभी अभियोजकों को निर्देशित किया गया कि प्रत्येक माह कम से कम एक वाद की केस डायरी बनायी जाए कि पुलिस द्वारा की गयी अपनी विवेचना में क्या-क्या त्रुटिया कमियां की गयी, जिससे कि वाद में स्टेट के विरुद्ध आदेश पारित हुआ, जिससे समीक्षा के दौरान उक्त बिन्दु पर भी सुधार किया जा सके तथा अधिक से अधिक वादों का निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। कुल 38 वादों में पक्षद्रोहिता के कारण अभियुक्त रिहा हो गए। अपर जिलाधिकारी द्वारा जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) तथा लोक अभियोजकों को निर्देशित किया गया कि रिहा हुए अभियुक्तों के वादों की पुनः विधिवत समीक्षा कर लें। यदि पुनः अपील किया जाना शासकीय हित में हो तो पुनः अपील का प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करें। कुछ वाद में पक्षद्रोही हुए गवाहों पर मुकदमा कर सजा दिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित किया जाये। हमारा प्रयास पीड़ित को न्याय दिलाना होना चाहिए, इसके लिए पत्रावली में वादी के अलावा अन्य उपलब्ध साक्षियों का भी साक्ष्य कराया जाये।
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