जिसने हिन्द का अपमान किया है, हमने उसकी मौत का एलान किया
कवि गोष्ठी में कवियों ने बिखेरी छटा
गाज़ीपुर। सृजन सारथी’, के तत्वावधान में शिवपुरी कॉलोनी के डॉ. अक्षय पाण्डेय के आवास पर ‘कवि-गोष्ठी’, साहित्यिक गरिमा और उत्सवधर्मिता के साथ संपन्न हुई।
कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन तथा महाकवि कामेश्वर द्विवेदी के शरदा-स्तवन से हुआ। गोष्ठी की अध्यक्षत रामपुकार सिंह ‘पुकार’ को माल्यार्पण, अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर अलंकृत किया गया।
काव्य-गोष्ठी में नवगीतकार डॉ. अक्षय पाण्डेय ने “शब्द-शब्द में संवेदन को लिखने जैसा है/गीतों को लिखना जीवन को लिखने जैसा है” प्रस्तुत की तो हरिशंकर पाण्डेय ने “हाय कैसी ज़माने की रफ्तार है/ऑंकता, भाँपता, मापता है पिता।” सुना कर श्रोताओं को पिताओं की दशा से जोड़ा। गजलकार गोपाल गौरव ने “खुश्बुए शेर से महक जाए जहां/तुम ग़ज़ल में ज़रा रातरानी लिखो” पर वाहवाही अर्जित की। वीररसावतार दिनेशचन्द्र शर्मा ने- “देश की एकता को विखण्डित नहीं होने देंगे।” से ओज भरा तो कामेश्वर द्विवेदी के गीत “चाँद तारे हमारे निकट तो हुए, पर सहोदर हमारा बहुत दूर है/दिव्य तन है मिला आदमी का मगर,हिंस्र चौपायों जैसे हुआ क्रूर है” ने खूब तालियां बटोरी।
संचालक डाॅ.रामनारायण तिवारी ने भोजपुरी गीत “जिनिगी जे रहल कचनार/काहें रे झरल चइते में पाता सुना कर खूब तालियां बटोरी। अध्यक्षीय काव्यपाठ में वरिष्ठ गजलगो रामपुकार सिंह ‘पुकार’ ने अपने शेर “जब कोई कभी हिन्द का अपमान किया है/हमने उसी की मौत का एलान किया है” से संगोष्ठी को ऊँचाई दी।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रियदर्शन पाण्डेय, संजय पाण्डेय, अवनीश गौतम, आदित्य यादव, प्रतिभा पाण्डेय, आराधना सिंह, अर्चना यादव, सरोज पाण्डेय सहित काफी संख्या में साहित्य-प्रेमी श्रोता उपस्थित रहे।
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