श्रीमद्भागवत कथा आत्मा के जागरण का एक महत्वपूर्ण साधन

गाजीपुर। श्रीमद् भागवत कथा भारतीय संस्कृति के महत्व को स्थापित करने के साथ ही उसे समृद्ध बनाने में मदद करती है।


 .        सादात नगर पंचायत के सुरेश चन्द्र वर्मा के आवास पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन मंगलवार को कथावाचक जय आशीष दूबे ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि महारास लीला जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। श्रीमद् भागवत कथा आत्मा के जागरण का एक महत्वपूर्ण साधन है जो व्यक्ति को जीवन के रहस्यों और चक्र को समझने में मदद करता है। भागवत कथा सुनने से व्यक्ति के जीवन में आई नकारात्मकता दूर होती है और पापों का नाश होता है। भागवत कथा का श्रवण करने से मोक्ष की प्राप्ति आसान हो जाती है।

     इस अवसर पर शिवानन्द सिंह मुन्ना, लल्लन वर्मा, सुरेश चन्द्र वर्मा, मधु सिंह, नंदिनी देवी, शांति देवी, रेखा, सुमन, नीलम, पूनम, अंशू, रमेश, विजय, दीपक, चन्दन, रवि, विजय, प्रदीप, राहुल, रोहन सहित काफी संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।

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