कलयुगी पत्नी ने रचा था पति को मारने का प्रयास

 न्यायालय के आदेश पर पत्नी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज 


गाजीपुर। सती सावित्री, देवी अहिल्या तथा देवी नर्मदा की पति भक्ति को धता बताते हुए एक कलयुगी विवाहिता ने अपने पति को विषाक्त पदार्थ खिलाकर मारने का असफल प्रयास किया। ससुराल में रात में पत्नी द्वारा दिए गए खाने के बाद जब पति की हालत बिगड़ने लगी और वह चिल्लाने लगा तो अपने को फंसता देख कर उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। चिकित्सा के बाद किसी तरह उसकी जान तो बच गयी लेकिन वह षड़यंत्रकारी पत्नी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने में असफल रह गया। थाने से लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक दौड़ के बाद भी उसकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई तो अंततः उसने न्यायालय की शरण ली थी।

       यह मामला नंदगंज थाना क्षेत्र के धरवा गांव का बताया गया है‌। मीडिया इस घटना की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। वादी सुदर्शन बिंद ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी सैदपुर थाना क्षेत्र के डहरा कला गांव की कलावती बिंद के साथ करीब आठ वर्ष पूर्व हुई थी। वह अपने माता-पिता के साथ रहकर मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार की जीविका चलाता है। शादी के बाद उसकी पत्नी ने एक बेटी और एक बेटा को जन्म दिया। सुदर्शन का आरोप है कि शादी के दो साल बाद पत्नी आये दिन घर में कलह करती रहती थी। सुदर्शन ने बताया कि गत वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर उसकी पत्नी अपने भाई को राखी बांधने के बहाने अपने मायके गई। वह अपने साथ सभी आभूषण, कीमती कपड़े और बच्चों को भी ले गई थी। दो-तीन दिनों के बाद सुदर्शन पत्नी की विदाई कराने के लिए ससुराल पहुंचा। उसे वहां ससुरालियों का व्यवहार कुछ अजीब लगा और पत्नी भी अनमने ढंग से पेश आई। जब वह पत्नी को ले जाने की बात कहा तो ससुराल के लोगों ने उसे रात में रुकने के लिए कहा तो सुदर्शन अपनी ससुराल में रुक गया। सुदर्शन के अनुसार, रात में पत्नी जब खाना लेकर आई तो सुदर्शन ने उससे भी अपने साथ खाने को कहा लेकिन पत्नी मां के साथ खाने का बहाना बनाकर टाल गई। इसके बाद उसने खाना खाया, खाना खाने के थोड़ी देर बाद ही उसे चक्कर आने लगे. कुछ देर बाद उसके मुंह से झाग निकलने लगा। अपनी खराब हो रही हालत की सूचना जब वह अपने परिवार के लोगों को मोबाइल से देना चाहा तो पत्नी ने उसका मोबाइल छीन लिया और अपने मोबाइल से  किसी दूसरे व्यक्ति से बात की कि जैसा आपने कहा था, मैंने वैसा ही किया है. लेकिन अब मेरा जी घबरा रहा है। यदि यह मर गया तो हमारे परिवार के सभी लोग फंस जाएंगे। 

      इस दौरान सुदर्शन चिल्लाते हुए अस्पताल जाने की जिद करता रहा। शोर होते देख उन लोग उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले गए। वहां से डाक्टर ने उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया। दो दिनों के इलाज के बाद वह डिस्चार्ज होकर वापस आ गया। उसने नंदगंज थाने पर इस घटना की तहरीर दी, उसकी तहरीर पर मुकदमा तो दर्ज नहीं हुआ उसके ससुराल की ओर से उसे जान से मारने की धमकी दी जाती रही। इससे परेशान होकर उसने पुलिस अधीक्षक को 18 सितंबर 23 को डाक के माध्यम से अपना शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। जब इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, तब उसने बाध्य होकर न्यायालय की शरण ली। तथ्यों को समझते हुए न्यायालय ने इस मामले में, पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी किया। न्यायालय के आदेश पर अब नंदगंज थाना पुलिस ने तीन नामजद सहित चार अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 147 ,328 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

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