प्रेमचंद का साहित्य तत्कालीन समाज का आईना  –  प्रो. वी के राय, प्राचार्य 

गाजीपुर। कथा सम्राट प्रेमचंद की 143वीं जयंती के अवसर पर स्वामी सहजानन्द स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सोमवार को हिंदी विभाग द्वारा संगोष्ठी का आयोजन सम्पन्न हुआ।

        संगोष्ठी में अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अजय राय ने कहा कि प्रेमचंद जैसे साहित्यकार रोज़-रोज़ पैदा नहीं होते। प्रेमचंद का समूचा साहित्य सुरक्षात्मक वैक्सीन की तरह है जो शोषण और दुर्व्यवस्था रूपी महामारी से समाज और राष्ट्र को बचा सकता है। राजनीतिशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कृष्णानन्द चतुर्वेदी ने कहा कि जब तक समाज में निर्धनता, शोषण और अनाचार रहेगा तब तक प्रेमचंद प्रासंगिक बने रहेंगे। प्रो. रामनगीना यादव ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद के साहित्य में निहित उदात्त मूल्यों को आत्मसात करने की आवश्यकता है।

समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. अवधेश नारायण राय ने प्रेमचंद के साहित्य का विवेचन करते हुए कहा कि ग्रामीण परिवेश और संस्कृति तथा लोक-मनोविज्ञान की जितनी सूक्ष्म पकड़ प्रेमचंद को थी वह अन्यत्र दुर्लभ है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. वी के राय ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य तत्कालीन समाज का आईना है जो वर्तमान समाज का भी मार्गदर्शन करता है। उन्होंने गोदान तथा अन्य रचनाओं को कालजयी कृतियों की श्रेणी में रखते हुए उनके पूरे कथा लेखन को आज के परिवेश में प्रासंगिक बताया. संगोष्ठी का विषय-प्रवर्तन हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. राकेश पांडेय ने किया। कार्यक्रम का सफल संचालन कार्यक्रम-संयोजक डॉ. प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ‘अनंग’ ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन सुरेश कुमार प्रजापति द्वारा किया गया। संगोष्ठी में प्रो. गायत्री सिंह,  प्रो. रामधारी राम, डॉ. विलोक सिंह, सन्ने सिंह, डॉ. नितिन कुमार राय, डॉ. विशाल सिंह, राजेश गुप्ता, विनय चौहान, डॉ. कृष्णकांत दुबे, सतीश राय, डॉ. कंचन सिंह, प्रियंका सिंह, विभा राय, संजय राय, संजय कुमार, तूलिका श्रीवास्तव, कुशलपाल यादव, अरविंद यादव, अजय कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।

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