कोरोना चैम्पियन बेबी पांच वर्षिया काब्या और कोरोना योद्धा पुलिस अधीक्षक बने कोरोना चैंपियन

डायबिटीज़ और हाई ब्लडप्रेशर होने के बाद भी
पुलिस अधीक्षक ने दी कोरोना को मात


गाजीपुर। एक तरफ जहां कोरोना को लेकर लोगों में दहशत का माहौल है तो वहीं दूसरी तरफ अपनी नियमित दिनचर्या, नियमानुसार बर्ताव और चिकत्सकीय देखरेख में कोरोना को मात देकर फिर से अपनी खुशियों को बटोरने में लगे हैं। ऐसे लोग ही मिशाल बनकर संक्रमित मरीजों की हौसलाआफजाई कर उन्हें प्रेरणा देकर जीने की नयी राह दिखा रहे हैं। जनपद में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच स्वस्थ होने वालों की तादाद में लगातार बढ़ोत्तरी होती रही है।
कोरोना को मात देने वाले ऐसे ही दो कोरोना चैंपियन गाजीपुर में हैं, जिन्होंने न सिर्फ कोरोना को मात दी है बल्कि फिर से अपनी दैनिक दिनचर्या में मशगूल हैं। इनमें एक पाँच साल की परी “काव्या सिंह” है जो दहशत के साये से निकलकर एक बार फिर अपने खिलौनों के साथ ख्यालों की दुनिया में मस्त है तो वही दूसरे महारथी हैं पुलिस अधीक्षक डा. ओमप्रकाश सिंह जिन्होंने कोरोना पर विजय प्राप्त कर एक बार फिर पूरे दमखम के साथ अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर हैं।
बताते चलें कि सदर कोतवाली के कृषि विभाग कॉलोनी की पांच वर्षिया काव्या 21 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव पायी गई थी। काब्या के पिता अभिषेक सिंह ने बताया कि उन्हें कई दिनों से बुखार आ रहा था। तब दोस्तों की सलाह पर उन्होंने खुद अपना और पत्नी व बेटी का कोरोना टेस्ट 14 जुलाई को कराया। कोरोना रिपोर्ट 21 जुलाई को मिली जिसमें बेटी काव्या पॉजिटिव निकली। इसके बाद बेटी के पॉजिटिव होने से खुद को भी होम आइसोलट करना पड़ा। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के एसीएमओ डॉ. प्रगति कुमार ने फोन पर पूरी जानकारी लिया और होम आइसोलेशन एप मोबाइल में इंस्टॉल करने के साथ ही जरूरी दवाओं के बारे में बताया, जिसे वह नियमित रूप से काब्या को देते रहे और बेटी स्वस्थ हुई। उपचार के दौरान 26 जुलाई को बेटी का जन्मदिन था। लेकिन होम आइसोलेशन की वजह से घर से निकलना मुश्किल था और बेटी लगातार जन्मदिन केक के लिए जिद कर रही थी। वह दिन काफी कष्टकारी रहा कि चाहकर भी वह बेटी के अरमानों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। असहाय अवस्था के उस दर्द को एक न्यूज़ चैनल ने बेटी के बर्थडे की न्यूज़ चलाकर दर्द पर मरहम लगाने का काम किया। काव्या के पिता अभिषेक सिंह ने बताया कि होम आइसोलेशन का पूरा पालन करते समय जब आस-पड़ोस के लोगों को जानकारी हुई। तब उन लोगों ने हौसला बढ़ाने के बजाय राशन, दूध, सब्जी वालों को इन सब सामानों को देने से मना कर दिया जिसको लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यह 10 दिन का समय जिंदगी का वह समय था जो कभी भूल नहीं पाऊंगा। लेकिन अब काव्या पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर आम बच्चों के साथ खेलती कूदती नजर आती है और पड़ोसियों ने भी पहले की तरह व्यवहार रखना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि अभी दो दिन पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय से भी फोन आया था जिसमें उन लोगों ने काव्या के स्वास्थ्य के बारे में पूरी जानकारी लिया है।

इसी प्रकार कोरोना को मात दे चुके चैम्पियन पुलिस अधीक्षक डॉ ओम प्रकाश सिंह की बात करें तो वह खुद अपने विभाग की कमान संभालते हुए पूरे जनपद को कोरोना मुक्त रखने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने लोगों को जागरूक करने के लिए गीत गाकर सोशल मीडिया के माध्यम से अपील करते नजर आए। दिन रात की भागदौड़ में वह खुद ब संक्रमित हो गये,पता ही नहीं चला। वे 23 जुलाई की रिपोर्ट में कोरोना पॉज़िटिव पाये गये और फिर उसके बाद उन्हें इलाज के लिए 24 जुलाई को केजीएमयू लखनऊ में भर्ती किया गया।

डॉ ओमप्रकाश ने बताया कि इस दौरान लखनऊ में, इनके निवास स्थान पर जब उनकी गाड़ी और ड्राइवर गया तो उस अपार्टमेंट के लोग दबी जुबान में विरोध करना शुरू कर दिए। इसकी जानकारी डॉ ओम प्रकाश सिंह को हुई तो उन्होंने तत्काल अस्पताल के कमरे से एक वीडियो बनाकर अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों तक भेजा कि घर में नहीं बल्कि अस्पताल में हैं। तब लोगों को विश्वास हुआ। उन्होंने बताया कि उन्हें पहले से ही डायबिटीज़ और हाई ब्लडप्रेशर की शिकायत थी जिसके वजह से वह हॉस्पिटल में एडमिट हुए थे। इस दौरान चाय और काढ़ा बनाकर पीते रहे और स्वयं जरूरी काम निपटाते रहे। उन्होंने बताया कि उनका इलाज करने वाले डॉ हिमांशु, डॉ छाया, डॉ भूपेंद्र का बहुत ही बढ़िया व्यवहार रहा जिनके सेवाभाव से वह फिर से स्वस्थ होकर और कोरेंटाइन का वक्त पूरा कर अपनी ड्यूटी पर एक अगस्त को वापस आ गये। उन्होंने बताया कि उपचार के दौरान एक दिन अस्पताल में काफी मायूस हो गए थे तब उन्होंने एक गाना गाया और उसे यादगार के रूप में सोशल मीडिया पर डाउनलोड भी कर दिया ताकि उन्हें उन तकलीफ भरे दिनों को याद दिलाता रहे।

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