रामलीला ! शबरी के बेर खाने के साथ ,हनुमान मिलन और सुग्रीव मित्रता का हुआ मंचन

गाजीपुर (उत्तर प्रदेश),17 अक्टुबर 2018। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी के तत्वाधान में बन्दे वाणी विनायकौ आदर्श रामलीला मण्डल के कालाकारों द्वारा स्थानीय रामलीला स्थल लंका के मैदान में राम की शबरी से भेंट,हनुमान मिलन,सुग्रीव मित्रता की लीला का मंचन किया गया।
लीला प्रसंग में दर्शाया गया कि घायल गिद्धराज जटायु से लंकापति रावण द्वारा सीता हरण की बात जानने के बाद जब जटायु श्रीराम के गोद में अपने शरीर का त्याग कर देता है। श्रीराम उसके शव का अन्त्येष्टि कर आगे बढ़ते हुए माता शबरी के आश्रम मे पहुचते हैं, जहां शबरी श्रद्धा भाव से उन्हें अपने जूठे बेर खिलाती है। श्रीराम उसकी भक्ति को देखकर बड़े आनन्द के साथ शबरी के मीठे बेर को खाते हुए उसका बखान करते हैं कि माता यह प्रेम का फल बहुत स्वादिष्ट है। श्रीराम के वचन सुनकर शबरी प्रसन्न होकर अपने गुरुदेव मतंग ऋषि की समाधि के पास ले जाकर दर्शन कराती है। इतना सुनने के बाद श्रीराम गुरुदेव मंतग ऋषि को प्रणाम करते हुए कहते है कि हे भिलनी, तेरी गुरु भक्ति अजर अमर है। इससे मै प्रसन्न होकर तुम्हे नवधा भक्ति प्रदान करता हूं। कहते है कि प्रथम भक्ति सतसुंग कर संगा, दूसरी मम निज कथा प्रसंगा। वहीं शबरी सीताजी के खोज के बारे में प्रभु श्रीराम से कहती है कि हे राम, आप पम्पापुर नामक राज्य मे जायें और वहां वानर राज सुग्रीव अपनी सेना के साथ अपने भाई बाली के डर से गुफा के अन्दर रहते है और वहा जाने पर सीता के बारे में सब पता चल जायेगा, इसके बाद प्रभु श्रीराम शबरी को मोक्ष गति प्रदान कर अपने भाई लक्ष्मण के साथ पम्पापुर नामक राज्य मे जाते है। उन दोनो वीरों को देखकर वानरराज सुग्रीव भयभीत होकर हनुमान को ब्राम्हण के भेष में उनके पास जाकर पता लगाने का आदेश देते हैं। अपने राजा सुग्रीव के आदेशानुसार हनुमान श्रीराम लक्ष्मण के पास आकर उनका परिचय पूछते है। श्रीराम जी अपना परिचय बताते हुए कहते है कि मै अयोध्या नरेश राजा दशरथ का पुत्र राम, और यह मेरा छोटा भाई लक्ष्मण है। हम दोनो भाई अपनी भार्या सीता की खोज में निकले है। इतना सुनने के बाद हनुमान ब्राम्हण भेष को त्याग कर अपने असली रुप में आकर श्रीराम से कहते है कि मै आपका सेवक हनुमान हॅू। इतना कहते हुए श्रीराम लक्ष्मण को अपने कन्धे पर बैठाकर महाराज सुग्रीव के पास लाकर श्रीराम लक्ष्मण का परिचय बताते है।


हनुमान के सारे बातो को सुनते हुए बानर राज सुग्रीव प्रभु श्रीराम के चरणों में प्रणाम करते है और श्रीराम महाराज सुग्रीव को उठाकर गले लगाते है। श्रीराम की भूमिका में बऊआ, लक्ष्मण- शिवा, सीता -गोलू, हनुमान -विजय, सुग्रीव -मुन्ना तिवारी, शबरी -राजा भईया तिवारी, जटायु – छोटू, सहयोगी बानर ललित, मोहन तथा व्यास के रुप में जय नारायण त्रिवेदी ने शानदार भूमिका निभाई। वाद्यों में नाल- पवन, आर्गन – संदीप व संगीत पर मस्तराम ने अहम भूमिका निभाकर दर्शको का मन मोह लिया। इस मौके पर कमेटी के अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, उपाध्यक्ष विनय कुमार सिंह, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी उर्फ बच्चा, उपमंत्री पं0 लवकुमार त्रिवेदी उर्फ बड़े महाराज, प्रबन्धक बीरेश राम वर्मा, उपप्रबंधक शिवपूजन तिवारी, राजकुमार शर्मा, राम सिंह यादव, पं0 बालगोविन्द त्रिवेदी, वैष्णो त्रिवेदी, कृष्णांश त्रिवेदी सहित हजारों दर्शकगण उपस्थित रहे।

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