प्रशासनिक टीम ने दो अवैध अस्पतालों पर मारा छापा, किया सील

भर्ती महिला मरीज को प्रशासन ने सरकारी अस्पताल में कराया भर्ती


गाजीपुर‌। जिले में संचालित अवैध हास्पिटलों में आये दिन मरीजों की जिन्दगी से खिलवाड़ का खेल बदस्तूर जारी है। क्षेत्र से मिली शिकायतों के बाद यदा-कदा स्वास्थ्य विभाग की नींद खुलती है और वह एक दो फर्ज़ी अस्पतालों की जांच और कार्यवाही कर फिर मौन साध लेता है और अवैध अस्पताल फिर अपनी पुरानी डगर पर चलते रहते हैं।

         जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के निर्देश पर नन्दगंज थाना क्षेत्र के रामपुर बन्तरा हाईवे पर संचालित आयुष्मान हास्पिटल पर गुरुवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। उपजिलाधिकारी सैदपुर ज्योति चौरसिया, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामकुमार तथा क्षेत्रीय पुलिस की संयुक्त टीम ने अचानक अस्पताल पर छापा मारा। मौके पर वहां कोई चिकित्सक या अस्पताल कर्मी मौजूद नहीं था लेकिन अस्पताल में महिला मरीज भर्ती पायी गयीं। बिना किसी चिकित्सकीय सहयोगी के भर्ती मरीज को देख अधिकारी हतप्रभ हो गये। उम्मीद जताई गयी कि सम्भवतः प्रशासनिक छापेमारी की जानकारी अस्पताल संचालक को हो गयी थी और मौके का फायदा उठाकर वह अपने सहकर्मियों सहित वहां से फरार हो गये।

      इस सम्बन्ध में एडिशनल सीएमओ डॉ. रामकुमार ने बताया कि इस अस्पताल के खिलाफ पहले भी 29 अगस्त 2025 को मुकदमा दर्ज किया गया था, इसके बावजूद यहां अवैध रूप से मरीजों का इलाज जारी था। शिकायत मिलने के बाद प्रशासनिक टीम मौके पर जांच हेतु पहुंची तो अस्पताल से सम्बंधित कोई नहीं मिला। वहीं सादात थाना क्षेत्र के छपरा निवासी एडिशनल सीएमओ डॉ. रामकुमार ने बताया कि इस अस्पताल के खिलाफ पहले भी 29 अगस्त 2025 को मुकदमा दर्ज किया गया था, इसके बावजूद यहां अवैध रूप से मरीजों का इलाज जारी था। शिकायत मिलने के बाद प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची तो कोई चिकित्सक या कर्मचारी मौजूद नहीं था लेकिन सादात थाना क्षेत्र के छपरा गांव की रुचि राजभर नामक महिला अस्पताल में भर्ती मिली। परिजनों के अनुसार वह पेट दर्द से पीड़ित थी और पिछले तीन दिनों से अस्पताल में भर्ती थी। स्थिति को देखते हुए उन्हें वहां से निकाल कर एम्बुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र देवकली भेंजकर भर्ती कराया गया। इसके उपरांत प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में अस्पताल को सील कर दिया गय। 

          इसके बाद जांच टीम शिव हॉस्पिटल बरहपुर पहुंची, लेकिन तब तक संचालक अस्पताल बंद कर मौके से फरार हो चुका था। प्रशासन की आकस्मिक छापेमारी से जहां जन सामान्य लोगों में खुशी रही वहीं अवैध अस्पताल संचालकों में हड़कंप मचा रहा। कहा गया कि यदि प्रशासन इसी प्रकार आकस्मिक निरीक्षण करता रहे तो अवैध अस्पतालों पर रोक लग सकेगी और भोली भाली जनता उनके चंगुल से बच सकेगी।    मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि डॉक्टर को दूसरा भगवान माना जाता है, लेकिन कुछ स्वार्थी लोग धन उगाही में लगकर इस पवित्र पेशे को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जिले में चल रहे ऐसे फर्जी अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीब मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ न हो सके।

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