भारतीय विवेक पर खड़ा व्यवहारिक समीक्षक माधव कृष्ण – प्रो. आनन्द सिंह
निबंध संग्रह ‘विचार सम्पुट’ का लोकार्पण सम्पन्न
गाजीपुर। उपनिषद मिशन ट्रस्ट के तत्वावधान में द प्रेसिदियम इंटरनेशनल स्कूल अष्टभुजी कालोनी, बड़ी बाग, लंका के सभागार में डॉ माधव कृष्ण की पुस्तक ‘विचार सम्पुट’ का लोकार्पण संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। कवयित्री रश्मि शाक्या ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम को गति प्रदान की।
मुख्य अतिथि ‘अथर्वा’ के सुकवि विचारक प्रोफेसर आनंद सिंह ने लेखक की मेधा का प्रभाव स्वीकार करते हुए कहा कि महात्मा गांधी पर उनका निबंध इस पुस्तक का बीज लेख है, और इस कारण वह समावेशी हैं। उन्होंने माधव कृष्ण को भारतीय विवेक पर खड़ा व्यावहारिक समीक्षक बताया जिसमें गढ़ने की व्याकुलता है और टकराकर अपनी बात कहने का जोखिम उठाने का साहस भी. माधव कृष्ण पश्चिम के मोह से मुक्त हैं और भारतीयता की अवधारणा व भाव इनके निबंधों में बैठे हैं।
विशिष्ट अतिथि एकांकीकार डॉ गजाधर शर्मा गंगेश ने कहा कि लेखक में पढ़ने और ग्रहण करने की गहराई है। नवऔपनिवेशिक सोच से बाहर वह भारतीयता की पुष्टि करते हैं। विशिष्ट अतिथि और चर्चित उपन्यासकार डॉ रामबदन राय ने ‘विचार सम्पुट’ को एक ऐसी पठनीय पुस्तक बताया जिसे आद्योपान्त पढ़ा जा सकता है।
दीनबंधू कॉलेज के प्रवक्ता आचार्य सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि माधव कृष्ण इस पुस्तक में भारतीय संस्कृति और अस्मिता की पड़ताल करते हैं, और साहित्य के संवेदनात्मक पक्ष को रेखांकित करते हैं। बाबू नंदन डिग्री कॉलेज के प्रवक्ता दिलीप दीपक ने केदार नाथ सिंह जी की कविता ‘बनारस’ पर माधव कृष्ण की समीक्षा को उद्धृत किया और उसे एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप बताया। डॉ श्रीकांत पाण्डेय ने विचार सम्पुट को वस्तुनिष्ठता, तटस्थता और साफगोई का दस्तावेज बताया। डॉ अम्बिका पाण्डेय ने आलोचना के विवध पहलुओं पर चर्चा करते हुए माधव कृष्ण को विस्तृत दायरे का आलोचक बताया तो समकालीन सोच के सम्पादक रामनगीना कुशवाहा ने इस पुस्तक को को एक व्यापक दृष्टि वाला गंभीर तार्किक कार्य बताया। महिला महाविद्यालय के डॉ निरंजन यादव ने कहा कि असहमतियों के बावजूद तथ्य यह है कि माधव कृष्ण के पास घृणा और चिढ़ नहीं है। यह पुस्तक उनके संवादी व्यक्तित्व की परिणति है। पूर्व प्राचार्य कम्युनिस्ट नेता डॉ रामबदन सिंह ने कहा कि माधव कृष्ण तैयारी के साथ हर काम करते हैं, और वक्तव्य भी देते हैं। वह नए लोगों को प्रोत्साहित करते हैं और अवसर भी देते हैं।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मान्धाता राय ने माधव कृष्ण की लेखन शैली को प्रांजल, निष्पक्ष और बोधगम्य बताया।
लेखक माधव कृष्ण ने अपने लेखकीय वक्तव्य में कहा कि मैं बड़ा लेखक नहीं। मैं उस बच्चे की तरह हूँ जो अपने पैरों के नाखून से धूल में चित्र बनाता है। उसका चित्र भी चित्र है और आर्ट गैलरी में महंगा बिकने वाला चित्र भी चित्र है, लेकिन भाव के स्तर पर दोनों का महत्व एक है।
सभा में दिनेश चन्द्र शर्मा, पूजा राय और यशवन्त सिंह यश ने काव्य पाठ से समारोह में ऊर्जा का संचार कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सभा में विवध क्षेत्रों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे जिनमें ब्रह्मकुमारी निर्मला, गायत्री बहन रोली, श्रीमती अनिल शर्मा, डॉ जयशंकर कुशवाहा, महेश चन्द्र लाल, बद्रीश, छत्रसाल सिंह, डॉ राम अवध कुशवाहा, सहेंद्र यादव, जवाहर वर्मा, ब्रिजेन्द्र यादव, प्रेम कुमार श्रीवास्तव, सोनू यादव, कमलेश यादव, दामिनी पाण्डेय, श्रीमती अभिमन्यु प्रधान,डा.ए.के. राय, दूधनाथ राय, प्रभाकर त्रिपाठी, अमरनाथ तिवारी, संतोष कुशवाहा, अमित श्रीवास्तव, अखिलेश्वर प्रसाद सिंह, दिनेश्वर दयाल श्रीवास्तव, डॉ सुधीर श्रीवास्तव, प्रमोद राय, महादेव, दुर्गविजय शर्मा, नागेश सिंह, उमेश सोशलिस्ट, प्रिंस भड़ासी, नित्यानंद राय, माखन प्रधान, आशुतोष श्रीवास्तव, गोपाल सिंह, दिलीप आर्य, आदित्य प्रकाश और हरिशंकर आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर संतोष सिंह व धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर शिखा तिवारी ने किया।
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