“मृत” बुजुर्ग ने डीएम से जिन्दा करने की लगाई गुहार 

मिर्जापुर। राजस्व विभाग में कार्यरत लेखपाल अब यमराज के रोल में नजर आने लगे हैं। कहा जाता है कि यमराज के यहां कर्मों का लेखा-जोखा होता है जिसके आधार पर मृतात्मा के लिए सजा और सहुलियत मिलती है। अब कलयुगी लेखपाल भी यमराज की भूमिका में नजर आने लगे हैं। 


         इसका ताजा उदाहरण सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम बोदवा में देखने को मिला। ग्राम पैडापुर निवासी दशरथ दुबे पुत्र राम मुहूर्त दुबे ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर अपने जिन्दा होने का सबुत दिया है। सेवानिवृत्त वृद्ध ने जिलाधिकारी से कहा कि साहब, मैं अभी जिंदा हूं, लेकिन सरकारी कागजों में मुझे मृतक बना दिया गया है। इतना ही नहीं, मेरी जमीन में दर्ज हिस्सेदारी भी आधी से घटाकर चौथाई कर दी गई है। ग्राम पैडापुर निवासी दशरथ दुबे ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि मौजा बोदवा के खाता संख्या 19, आराजी संख्या 19 में उनका वास्तविक अंश 1/2 है, जबकि क्षेत्रीय लेखपाल ने बिना किसी जांच-पड़ताल और सूचना के उनका हिस्सा घटाकर 1/4 दर्ज कर दिया। उन्होंने कहा कि जुलाई 2025 में ऑनलाइन आवेदन संख्या 2025211572200006 के माध्यम से अंश संशोधन की मांग की थी, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी मामला ज्यों का त्यों है। तहसील की मुसक परिक्रमा के बाद भी अब तक समाधान नहीं मिला है। दिलचस्प बात यह है कि राजस्व अभिलेखों में खाता संख्या 19 के एक मृतक खातेदार की प्रविष्टि को लेकर भी विवाद सामने आया है। आरोप है कि अभिलेखों में उन्हें ही मृतक दर्शा दिया है। अब देखना यह है कि डीएम के संज्ञान में आने के बाद सरकारी कागजों में “मृत” घोषित किए गए इस बुजुर्ग को राजस्व विभाग दोबारा “जिंदा” कब करता है और खेत जमीन में उनकी वास्तविक हिस्सेदारी उन्हें कब तक मिलती है।

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