कविता ! “इकरार हुआ”

“इकरार हुआ ………..


कुछ तो तुममे है जो हमको तुमसे प्यार हुआ,
वर्ना ये दिल अब तक किसी और पर न निसार हुआ।

जब आई तुम मेरे जीवन में आते ही जगह बना ली,
तुम ही बनोगी हमारी ऐसा न कभी विचार हुआ।

कहते हैं दुनिया वाले तुमने है सब बदल दिया,
कुछ हमें भी तो बताओ यह बदलाव कैसे हुआ।

न जाने खुदा ने तुम्हें क्या जीज बक्सी है,
जबसे मिला हूँ तुमसे तुम्हारा ही तलबगार हुआ।

ये भी सच है कि मैं इस जमाने से हट कर हूँ,
बड़े नसीब से इस वत्स को यह इकरार हुआ।

कवि – अशोक राय वत्स
रैनी (मऊ ) उत्तरप्रदेश

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