जनगणना ड्यूटी में लगाए गए दूर के स्कूलों के अध्यापक

एक ही जाति विशेष के अधिकांश अध्यापकों की ड्यूटी लगना बना चर्चा का कारण 


गाजीपुर। सादात नगर पंचायत में जनगणना और भवन सूचीकरण का कार्य प्रगति पर है। इसके लिए नगर क्षेत्र के स्कूलों के अध्यापकों के स्थान पर दूर दराज के स्कूलों के अध्यापकों को रखा गया है। 

      इस कार्य मे एक बिरादरी विशेष के 19 अध्यापकों की ड्यूटी लगाये जाने से यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। इस प्रकरण को लेकर प्रशासनिक पारदर्शिता और अधिकारियों की मंशा पर भी सवालिया निशान लगने लगा है।      

      उल्लेखनीय है कि शासन की अनिवार्य गणना ड्यूटी के तहत सादात नगर पंचायत क्षेत्र में कुल 29 अध्यापकों को कार्य में लगाया गया है। इनमें से सादात नगर के स्कूलों के कम और दुसरे क्षेत्र के अधिक अध्यापकों को कार्य सौंपा गया है, जिनमें बड़ागांव, माहपुर, ससना, भरतपुर, कबीरपुर, बक्सुपुर, डढवल, बिजरवां, अकबरपुर, बसखारी, इशोपुर, आतमपुर छपरा, बरवां कला, गौरा आदि विद्यालयों के अध्यापक तैनात किए गए हैं। इसमें खण्ड शिक्षा अधिकारी के स्वजातीय 19 अध्यापक शामिल हैं। वहीं इसमें शामिल सभी पांच पर्यवेक्षक नरेंद्र यादव, शीतला प्रसाद यादव, सुभाष यादव, डॉ. राजेश यादव और संतोष यादव सभी एक जाति विशेष के ही हैं।

      क्षेत्रीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि एक ही बिरादरी के इतने अधिक अध्यापकों को  कार्य विशेष पर रखना मात्र एक संयोग है या फिर सोची समझी चाल। नगर क्षेत्र में इस बात की चर्चा तेज है कि यह किसी विशेष प्रभाव या मिलीभगत का परिणाम तो नहीं है।

      इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी सीताराम यादव का कहना है कि नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी ने गणना कार्य के लिए अध्यापकों की डिमांड किया था, जिस पर वरीयता क्रम के अनुसार, पर्यवेक्षक और प्रगणक के लिए कुल 32 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें से कुछ शिक्षकों को रिजर्व भी रखा गया है।

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