मस्तक स्वदेश का कर ऊँचा.. भारत की तुम पहचान बनो

स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी प्रेरणा स्रोत 


गाजीपुर। ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वामी विवेकानन्द जयंती की पूर्व सन्ध्या पर विचार-गोष्ठी सह कवि-गोष्ठी सम्पन्न हुई

       सुसुण्डी गाँव में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं स्वामी विवेकानन्द के चित्र पर माल्यार्पण-पुष्पार्चन से किया गया। सरस्वती वन्दना प्रीतम कुशवाहा ने प्रस्तुत किया।

      साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द का जीवन सेवा, समर्पण और त्याग का प्रतीक है। उन्होंने पूरे विश्व में योग,अध्यात्म और वेदान्त का प्रचार किया। उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास, परिश्रम और राष्ट्रसेवा का सन्देश दिया। उनका जीवन हमें सच्चाई, सेवा और साहस का मार्ग प्रशस्त करता है। अन्य वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद के कृतित्व व व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए उनके विचारों को आज भी प्रासंगिक बताया। कहा गया कि उनके विचारों को आत्मसात करने हेतु उनकी जयंती युवा दिवस के रुप में मनाई जाती है। वक्ताओं ने युवाओं का आह्वान किया कि वह स्वामी जी के आदर्श से प्रेरणा लेकर समाज तथा राष्ट्रहित में सहयोगी बनेंं।      

     कार्यक्रम के दूसरे चरण में युवा व्यंग्यकार आशुतोष श्रीवास्तव ने विवेकानन्द को अपनी इन पंक्तियों के साथ स्मरण किया-परमहंस के शिष्य/ हम सबके अभिमान हो। माँ भारती के अमर सपूत/भारत का सम्मान हो। नागेश मिश्र ने ‘तारों से ऊपर चलो/चल के देखें/मसीहा कहाँ खो गया.. सुनाकर वाहवाही लूटी। अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने ‘तुम ज्ञानवान,धीमान बनो/गुणवान परम बलवान बनो/ मस्तक स्वदेश का कर ऊँचा/ भारत की तुम पहचान बनो’ सुनाकर श्रोताओं की तालियाँ बटोरीं। कवयित्री प्रीतम कुशवाहा ने ‘जिन्दगी कटेगी मेरी गीत गजल गाने में/गीत और गजलों को एक स्वर मिलाने में’। सुदर्शन कुशवाहा ‘चिराग’ ने अपनी गजल की ये पंक्तियाँ ‘तेरे नूर से ऐ जानिब/मेरा अंजुमन सजा है/ कैसे बताएँ कितना/उल्फत में क्या मजा है/कितना मना रहा हूँ/मगर मानता नहीं/बदकिस्मती से यारों मेरा दिल ही बेवफा है’ सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सर्वजीत कुशवाहा, विवेक, श्रीकृष्ण कुशवाहा, हरिद्वार सिंह कुशवाहा, द्वारिका कुशवाहा, कमलेश, कविता, सावित्री, राधिका, प्रतिभा, कौशिल्या आदि उपस्थित रहीं।

            कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सुदर्शन कुशवाहा ‘चिराग’ एवं संचालन सुपरिचित ग़ज़लकार नागेश मिश्र ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी ने किया।

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