एक तरफ सूखा तो दूसरी तरफ बाढ़ से त्रस्त हैं किसान

चेतावनी बिन्दु पार कर खतरा बिंदु से उपर बह रही गंगा


गाजीपुर। जिले में हुई अल्प वर्षा से जहां किसान अपनी धान की फसलों की सिंचाई को लेकर चिंतित रहे और निजी नलकूप के माध्यमों से किसी तरह धान की फसल को  बचाने में लगे हैं, वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश व पहाड़ों पर हो रही तीव्र बरसात से गंगा का जलस्तर वर्तमान समय में लगातार बढ़ाव पर है।

      वर्तमान समय में उफनती गंगा नदी खतरे के निशान को पार कर लगातार आगे बढ़ने को बेताब है। लगातार जलस्तर बढ़ने से गंगा के किनारे व तटवर्ती क्षेत्रों में बसे लोगों को अपना आशियाना डूबने की फिक्र लगी हुई है तो वहीं तटवर्ती क्षेत्रों के किसान अपने खेतों की मिट्टी को कटकर नदी में समाते व अपनी खेती को डूबकर बर्बाद होते देखकर अपना माथा पीट रहे हैं। वहीं नदी की तलहटी में गोभी, मिर्चा सहित अन्य सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के खेत पानी में डूब गये हैं और सारी सब्जियां गलकर नष्ट हो रही हैं और मिट्टी के कटान से खेत भी गंगा में समाहित होने से ग्रामीण परिवारों के सामने रोज़ी रोटी का संकट उत्पन्न होने लगा है।

        शनिवार 02 अगस्त की शाम पांच बजे गंगा का जलस्तर खतरा बिंदु (मध्य स्तर) 63.105 मीटर की रेखा को पार कर 63.620 मीटर पर बह रही हैं और वर्तमान समय में जलस्तर तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे बढ़ाव पर है। वहीं दोपहर एक बजे गंगा का जलस्तर 63.500 मीटर रहा। 

        बताते चलें कि जिले में गंगा नदी के बाढ़ की स्थिति का मापदंड निर्धारित है। जिले में सामान्य जलस्तर 59.906 मीटर, चेतावनी बिंदु (निम्न स्तर)  62.100 मीटर,  खतरा बिंदु (मध्य स्तर) 63.105 मीटर तथा  बाढ़ का उच्च स्तर 65.220 मीटर निर्धारित है।                                                                      उल्लेखनीय है कि जिले में वर्ष 2019 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.530 मीटर, वर्ष 2021 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.680 मीटर, वर्ष 2022 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.390 मीटर तथा 2023 बाढ़ का उच्च जलस्तर 61.700 मीटर रहा था।     

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