अवैध अस्पताल सीज, चार प्रसुताओं को महिला जिला चिकित्सालय में किया गया शिफ्ट 

गाज़ीपुर। स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण शहर सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में फर्जी चिकित्सालय, जांच घर धड़ल्ले से चल रहे हैं। जच्चा बच्चा केन्द्र, मेटरनिटी होम, डायग्नोस्टिक सेंटर, पैथोलॉजी तथा जांच घर के नाम पर संचालकों द्वारा आये दिन भोली भाली जनता को लूटा जा रहा है। ऐसे धोखेबाज स्वास्थ्य केंद्र संचालकों द्वारा जनपद में दर्जनों घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे अस्पतालों व जांच घरों में अप्रशिक्षित लोगों द्वारा मरीजों की जिन्दगी के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर दोनों हाथों से धन उगाही की जाती है। ऐसे अस्पतालों में कहीं नवजात शिशु तो कहीं प्रसूता की ही मौत हो चुकी है।                                                                                ऐसे अस्पतालों की शिकायत पर यदा कदा जांच कर स्वास्थ्य विभाग अपनू कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है और फिर बाद में वहीं अस्पताल फिर से स्थान या नाम बदलकर अपना कार्य प्रारंभ कर देता है।   ऐसी ही एक घटना हंसराजपुर क्षेत्र के नसीरपुर में स्थित दीप शिखा हॉस्पिटल में देखने को मिली। जब सहायक नोडल अधिकारी डा शिशिर शैलेश के स्वास्थ्य विभागा की टीम इस प्राईवेट अस्पताल में पहुंची तो वहां  की स्थिति देखकर हतप्रभ रह गयी। वहां हॉस्पिटल मे चिकित्सक तो दूर कोई मेडिकल स्टाफ भी नहीं था। वहीं बगैर किसी योग्य चिकित्सक के अभाव में अस्पताल मे सिजेरियन आपरेशन किये गये थे और अस्पताल में पांच महिला मरीज भी भर्ती थे। इनमें से चार महिलाओं की डिलेवरी के लिये सर्जरी की गयी थी।


       यह स्थिति देखकर जांच टीम ने जब संचालिका से सर्जन व मेडिकल स्टाफ के बारे में पूछताछ की तो वह माकूल जवाब नहीं दे सकी और वहां से फरार होने की कोशिश में लगी रही जबकि मौके पर मौजूद पुलिस टीम ने उसे अस्पताल में रोके रखा। वहीं अस्पताल के लगे बोर्ड पर सर्जन व एक आयुर्वेदिक चिकित्सक का नाम दर्ज है।

बगैर किसी सर्जन और मेडिकल टीम के अस्पताल में मौजूद प्रसुताओं को स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम ने उनके बेहतर इलाज हेतु जिला महिला चिकित्सालय में शिफ्ट कराया। इसके साथ ही जहां टीम ने अस्पताल संचालिका सहित दो लोगों के विरुद्ध जंगीपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराते हुए अस्पताल को सीज कर दिया। इस घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोगों का कहना है कि यदि चिकित्सा विभाग सतर्क रहता तो ऐसे अस्पताल क्षेत्र में खुल ही नहीं पाते और ना कोई मरीज इनके माया जाल में फंसता।‌      

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