प्रेमचंद की परम्परा के साहित्यकार हैं संजीव

गाजीपुर। शहर के एम जे आर पी पब्लिक स्कूल में कथाकार संजीव पर केंद्रित समकालीन सोच विशेषांक का विमोचन रविवार को किया गया।               समकालीन सोच परिवार द्वारा आयोजित गोष्ठी में बोलते हुए वक्ताओं ने कथाकार संजीव के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संजीव गरीब, किसान, मजदूर और शोषित पीड़ित जनता की आवाज बुलंद करने वाले एक सशक्त कथाकार है।


      वीरेंद्र यादव ने  संजीव को प्रेमचंद की परंपरा का कथाकार बताया। रोहिणी अग्रवाल ने कहा कि समकालीन सोच परिवार ने उन पर विशेषांक प्रकाशित कर प्रशंसनीय कार्य किया है। समकालीन सोच के संपादक राम नगीना कुशवाहा ने कहा कि संजीव का कथा साहित्य मेहनतकश जनता का साहित्य है।

       संगोष्ठी के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार रामावतार ने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण ही नही होता बल्कि वह समाज को दिशा भी देता है। प्रेमचंद पहले कथाकार है जिन्होंने साहित्य को सामाजिक यथार्थ से जोड़ा और चंद्रकांता के पाठको को गोदान तक ले गये। संजीव ने अपने कथा साहित्य के माध्यम से उस परंपरा को आगे बढाया है। संगोष्ठी में रविभूषण, प्रेमकुमार मणि,शिव मूर्ति, शिव कुमार यादव, संजीव चंदन, योगिता यादव, बलभद्र, सुधीर सुमन,  संजय सुमति, श्रीकांत पांडेय आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।  प्रमुख लोगों में पूर्व सांसद जगदीश सिंह कुशवाहा, अशोक सिंह, पत्रकार प्रमोद कुमार राय, डा रामबदन सिंह, अमरीका यादव, जनार्दन शर्मा, राम अवतार शर्मा, शिवम विश्वकर्मा आदि प्रमुख रहे। संचालन रामजी सिंह यादव तथा आभार ज्ञापन बद्री सिंह ने किया।

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