जन्म-जन्मांतर के संस्कार जागृत होने से मिलता है संतों का सानिध्य – महात्मा सुजाता बाई 

सलेमपुर बघाई में सद्भावना सत्संग ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन संतों ने दिया सद्भावना का संदेश


गाजीपुर। जिले के सलेमपुर बघाई में आयोजित सात दिवसीय ‘श्रीमद् भागवत सद्भावना सत्संग ज्ञानयज्ञ’ के तीसरे दिन आचार्यजनों ने विधिवत मन्त्रोंच्चारण के साथ पूजन अर्चन कर पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। आचार्य सुनील पाण्डेय रेवती, आचार्य रजनीश उपाध्याय, पंडित अमन तिवारी, पंडित आशुतोष पाण्डेय, वेदाचार्य आशीष उपाध्याय, वेदविभूषण पंकज ओझा और गोलू मिश्रा ने वैदिक मन्त्रोचारण के साथ पूजन अर्चन किया।

          तीर्थंनगरी प्रयागराज से पधारे पूज्य महात्मा सारथानंद जी ने श्रीमदभागवत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागवत का असली महत्व यही है कि आप यहां सच्चे संतों के सानिध्य में बैठकर अमृतपान कर रहें है। 

      उन्होंने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य पर कहा कि कलिकाल के प्रभाव से लम्बी यात्रा करने पर वृन्दावन-मथुरा पहुंचते ही भक्ति युवावस्था को प्राप्त हो गयी और उसके दोनों बेटे ज्ञान और वैराग्य बूढ़े हो गए अर्थात निष्क्रिय हो गए। 

          बलिया से पधारे महात्मा सूर्यानन्द जी ने श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि “भक्ति करें कोई सुरमा, जाति, वर्ण, कुल खोय” अर्थात ज़ब तक हमारे ऊपर तेरा-मेरी, ऊंच-नीच, छोटे-बड़े का नशा रहेगा तब हम भक्ति नहीं कर पाएंगे। 

   वाराणसी के महात्मा सुजाता बाई जी ने कहा कि ज़ब हमारे जन्म-जन्मांतर के संस्कार जागृत होते है तब संतों का सानिध्य प्राप्त होता है, और ज़ब सच्चे संत मिलते है तब भगवान से मिलने का मार्ग प्रशस्त होता है। वहीं गाजीपुर प्रभारी महात्मा दयावती बाई जी ने अपने ज्ञानवर्धक उद्बोधन से भक्तों को लाभान्वित किया।

    कार्यक्रम सम्पन्न कराने में रामाश्रय सिंह यादव, डॉ. संतोष यादव (ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि सादात), अरविन्द कुमार यादव, काशीनाथ यादव जी, नन्दलाल पाल, अशोक जायसवाल, सुभाष चौहान और समिति के शाखा कार्यकर्ता व मानव सेवा दल के स्वयंसेवकों  की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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