‘गंगेश’ की पुस्तक ‘गाजीपुर के काव्य-साहित्य का इतिहास’ का लोकार्पण सम्पन्न
गाजीपुर। डाॅ.गजाधर शर्मा ‘गंगेश’ की पुस्तक ‘गाजीपुर के काव्य-साहित्य का इतिहास’ का लोकार्पण रविवार को सम्पन्न हुआ। साहित्य चेतना समाज के बैनर तले लंका मैदान स्थित सभागार में भोलानाथ त्रिपाठी विह्वल की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के सेवानिवृत्त प्रो. डाॅ.अवधेश प्रधान रहे।
डॉ. गजाधर शर्मा गंगेश ने कहा कि इस काव्य-इतिहास में गाजीपुर की उर्वरा साहित्यिक भूमि की फसलें लोगों के समक्ष लाया गया है। यह पूर्वजों को मेरी श्रद्धांजलि है और नए लोगों को इतिहास और साहित्य के क्षेत्र में कार्य करने के लिए आह्वान करती है।
आधार वक्तव्य में माधव कृष्ण ने कहा कि समाज के नव-निर्माण में उसके ऐतिहासिक धरोहरों का ज्ञान और उपयोग बहुत बड़ी भूमिका अदा करते हैं। डॉ.गंगेश ने निरपेक्ष रहते हुए 428 कवियों को और लगभग छह सौ वर्षों की साहित्यिक चेतना के इतिहास को संकलित करने का कार्य किया है।
मुख्य अतिथि प्रो.अवधेश प्रधान ने कहा कि साहित्य ने इस देश को संस्कार की पहचान दी है। शब्द में अर्थ आचरण से आता है। एक विभाग था जिसे अंग्रेजों ने शुरू किया था और वह १९७८ तक चला आया, वह विभाग हर जनपद के विषय में सब कुछ लिखते थे, क्योंकि जिन पर शासन करना है उनके विषय में जानना चाहिए. इस परम्परा को गंगेश जी ने आगे बढाया है। हमारे कवियों ने इस देश का निर्माण किया है, जैसे तुलसी ने श्रीराम दिया और वेदव्यास ने श्रीकृष्ण को दिया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में भोलानाथ त्रिपाठी विह्वल’ ने कहा कि कृति का लोकार्पण कृतिकार की पुत्री के विवाह के समान होता है। गंगेश जी ने दुर्धर्षपूर्ण परिस्थितियों में इस कृति को चुना है जिसके लिए वह धन्यवाद के पात्र हैं।
वक्ताओं की कड़ी में शेषनाथ राय,डॉ अजीत कुमार राय, राजेन्द्र सिंह, प्रो.आनंद सिंह, डॉ.कमलेश राय, रामबचन यादव बेराही, प्रो.विजय शंकर मिश्र, डॉ रविनंदन सिंह, ओम धीरज, डॉ.रामबदन राय,ज्ञडॉ. देवेन्द्र, हिमांशु उपाध्याय आदि ने डा. गंगेश को उनकी अद्वितीय कृति हेतु बधाई दी। उन्होंने कहा कि साहित्य के शोधकर्ताओं के लिए भी यह पुस्तक सहयोगी बनेगी और उन्हें आगे कार्य के लिए उन साहित्यकारों का भी नाम मिलता है जिनका अब कोई वंश नहीं है। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डाॅ.रविनन्दन वर्मा, डाॅ.संतोष सिंह, हीरा राम गुप्ता, डाॅ.व्यासमुनि राय, राजीव मिश्र, नागेश मिश्र, आनन्द प्रकाश अग्रवाल, डाॅ.श्रीकान्त पाण्डेय, मुक्तेश्वर श्रीवास्तव, सुहैल खाँ, गिरीश शर्मा, आशुतोष श्रीवास्तव, शिवम प्रकाश त्रिपाठी, डाॅ.युद्धिष्ठिर तिवारी, श्यामनगर, डाॅ.दिनेश सिंह, डाॅ.प्रतिभा सिंह, धोनी डाॅ.पारसनाथ सिंह, विपिन बिहारी राय, मृत्युंजय राय, अलका त्रिपाठी, संजीव श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन साहित्य चेतना समाज के उपाध्यक्ष संजीव गुप्त एवं धन्यवाद ज्ञापन संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने किया।
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