श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ में संतों ने दी शांति और सद्भावना की सीख
भगवान से मिलने का सही मार्ग बताते है संत – महात्मा सुजाता बाई जी
गाजीपुर। सादात ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि डॉ. संतोष कुमार यादव के पैतृक गांव सलेमपुर बघाई में आयोजित सात दिवसीय ‘श्रीमद् भागवत सद्भावना सत्संग ज्ञानयज्ञ’ के दूसरे दिन संतों के प्रेरणादायक प्रवचनों से वातावरण भक्तिमय रहा।
मुख्य यजमान डॉ.संतोष कुमार सिंह यादव एवं उनके परिवार द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। कथा के दूसरे दिन का शुभारंभ किया गया।
इस दौरान आचार्य सुनील पाण्डेय रेवती, आचार्य रजनीश उपाध्याय, पंडित अमन तिवारी, पंडित आशुतोष पाण्डेय, वेदाचार्य आशीष उपाध्याय, वेदविभूषण पंकज ओझा और गोलू मिश्रा ने मन्त्रोंचारण के साथ विधिवत पूजा अर्चना की। मंचासीन सभी पूज्य संत-महात्मागणों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया।
सत्संग के दूसरे दिन देश के विभिन्न तीर्थं स्थलों से आए प्रतिष्ठित संतों ने जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि शांति बाहर नहीं बल्कि मनुष्य के अंदर ही है। प्रयागराज प्रभारी महात्मा चंद्रभानानंद जी ने कहा कि जिस शक्ति के रहते हम जीवन जी रहें है, संसार के सभी कार्य कर रहें है, अगर उस शक्ति को नहीं जाना तो हमारा संसार में आना व्यर्थ है। आज चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है, अशांति का वातावरण बना हुआ है, सभी अन्दर से भयभीय है। इससे बचने के लिए हमें भगवान के भजन व भक्ति कर अपना जीवन सफल बनाना होगा।
मऊ प्रभारी महात्मा सारथानंद जी, वाराणसी प्रभारी महात्मा सुजाता बाई जी और गाजीपुर प्रभारी महात्मा दयावती बाई जी ने अपने ज्ञानवर्धक उद्बोधन में जीवन के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला।
कहा कि यदि हृदय में भक्ति और विचार में शुचिता हो, तो ईश्वर का साक्षात्कार सुलभ हो जाता है। उनके इन मार्मिक और प्रेरणादायक वचनों को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और संपूर्ण परिसर तालियों और जयकारों से गूँज उठा।
डॉ. संतोष कुमार यादव ने कहा कि इस आयोजन का एकमात्र लक्ष्य समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाना और आपसी भाईचारे एवं सद्भाव का प्रसार करना है।
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