नालायक कहती थी जिसको वतन के काम आया हैं

कवि सम्मेलन में लगे ठहाके 


गाज़ीपुर। साहित्य चेतना समाज एवं मित्र मण्डली परिवार के संयुक्त तत्वावधान में जंगीपुर के मैरेज हाल में एक सरस कवि-सम्मेलन सम्पन्न हुआ।

      भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश कार्य समिति के सदस्य मारकण्डेय गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि विधायक मुगलसराय रमेश जायसवाल तथा विशिष्ट अतिथि साहू समाज के प्रदेश अध्यक्ष रामप्रसाद साहू, नगर पंचायत जंगीपुर की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती विजयलक्ष्मी व सत्यनारायण गुप्ता, शैलेष कुमार, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अशरफ अली, बिरनो ब्लाक के पूर्व प्रमुख सुबाष चन्द्र गुप्ता, साहित्य चेतना समाज के उपाध्यक्ष संजीव गुप्त उपस्थित रहे। 

         कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन से हुआ। अतिथियों का स्वागत साहित्य चेतना समाज की जंगीपुर इकाई के प्रभारी विद्युत प्रकाश और मित्र मण्डली परिवार के संयोजक राजेश वर्मा ने किया। साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर ‘ ने ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम की उपयोगिता पर चर्चा करते हुए कहा कि इसके माध्यम से संस्था आम जन में सार्थक साहित्य के प्रति अभिरूचि एवं जागृति पैदा करने का प्रयास कर रही है। मुख्य अतिथि रमेश जायसवाल ने संस्था द्वारा किये जा रहे साहित्यिक-सांस्कृतिक जागरण के प्रयास की प्रशंसा की।

          कवि-सम्मेलन का प्रारंभ ऋतु दीक्षित की वाणी वन्दना से हुआ। इसके बाद ओज के कवि हेमन्त निर्भीक ने ‘तिरंगे में लिपट कर देख तेरा ये लाल आया है   नालायक कहती थी जिसको वतन के काम आया हैं’ सुनाकर श्रोताओं की प्रशंसा अर्जित की। हास्य कवि डाॅ.अशोक अज्ञान ने अभी हाल ही में घटित घटना का उल्लेख करते हुए ‘हो गया है इश्क तो मुझे भरम नहीं रहेगा, यहाँ मत करो ड्रामा घर में डरम नहीं रहेगा’ सुनाकर खूब तालियां बटोरी। ऋतु दीक्षित ने अपने गाँव और अपनी माटी के प्रति अपने लगाव को दर्शाती अपनी यह भावपूर्ण पंक्तियां ‘इहे त बाटे ए गो आपन थाती, याद आवऽ ता आपन गाँव आपन माटी’ सुनाकर श्रोताओं को रससिक्त कर दिया। हास्य-व्यंग्य के चर्चित कवि व मंच संचालक नागेश शांडिल्य ने अपनी हास्य-व्यंग्य रचनाओं से श्रोताओं को हँसाकर लोट-पोट कर दिया। प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक नागेश शांडिल्य ने ‘हमारा एक वक्त का खाना रोज बचता है, क्योंकि दोपहर का खाना स्कूल में ही पकता है’ सुनाकर श्रोताओं को खूब आनन्दित किया। राज लक्ष्मी ने ‘नहीं मैं चाहती कि मैं बाग का फूल बन जाऊं, मैं श्रोताओं के चरणों की बस धूल बन जाऊं’ सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी।

          इस अवसर पर साहित्य चेतना समाज के अध्यक्ष डाॅ.रविनन्दन वर्मा,उपाध्यक्ष संजीव गुप्त,सचिव हीरा राम गुप्त,संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी,इंजी.मनीष गुप्त,गंगा विशुन यादव,रामजी वर्मा,बृजेश वर्मा,लालजी गुप्ता,राजेश गुप्ता,नीरज वर्मा, डा.डी.के.वर्मा, बेचन वर्मा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। आभार ज्ञापन विद्युत प्रकाश ने किया।

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