दीक्षांत समारोह ! स्वर्ण पदक पाकर खिले विद्यार्थियों के चेहरे, राज्यपाल ने दी प्रमाणिकता एवं पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ने की सीख
जौनपुर(उत्तर प्रदेश),05 नवम्बर 2018।दीक्षांत समारोह में शपथ लेना सरल पर उसे निभाना कठिन है। इसे निभाने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति का होना बहुत जरूरी है। आप प्रमाणिकता एवं पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ो, असफलता के बारे में आत्मनिरीक्षण करो, अपने को अपडेट रखो तो उपलब्धियां आपके चरण चूमेगी।
उक्त उद्गार वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 22 वें दीक्षांत समारोह में प्रदेश के राज्यपाल एवं कुलाधिपति राम नाईक ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में व्यक्त किया।

उन्होंने स्नातक एवं स्नातकोत्तर में सर्वोच्च अंक हासिल करने वाले 58 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक तथा 116 पी-एच.डी. धारकों को उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर माइकोलॉजी एवं पौध रोग विज्ञान विभाग, कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू वाराणसी में कार्यरत रहे प्रो0 उदय प्रताप सिंह को मानद उपाधि “डाक्टर आफ साइंस” व गणित में डॉ सत्य प्रकाश सिंह को डी.एस-सी की उपाधि दी से सम्मानित किया गया। अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राज्यपाल राम नाईक ने कहा की गोल्ड मेडल और उपाधि पाने वाले विद्यार्थियों को हर क्षेत्र में जागरूक रहने की सलाह दी। उच्च शिक्षा के विश्लेषण के क्रम में कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालय में गोल्ड मेडल और उपाधि पाने वालों में 51 फीसदी छात्राएं हैं जो महिला सशक्तिकरण को दर्शाता है। सन 2000 में सर्व शिक्षा अभियान की बुनियाद अटल बिहारी वाजपेई की सरकार ने रखी थी और वर्तमान की मोदी सरकार ने बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ को बढ़ावा दिया, जिसका असर अब देखने को मिल रहा है।
समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय भौतिकीय प्रयोगशाला के पूर्व निदेशक एवं वर्तमान में रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संगठन, भारत सरकार के डॉ. राजा रमन्ना विशिष्ट फेलो प्रो. विक्रम कुमार ने कहा कि आज का दिन विद्यार्थियों का दिन है, उनके कठिन परिश्रम और परिणाम का दिन है।उन्होंने कहा कि आज समाज में एक बड़ा संरचनात्मक परिवर्तन आया है, जिससे लोगों के जीवन स्तर में बदलाव आया है। कहा कि हमें वैश्विक स्तर पर मुद्दों का सामना करने के लिए और भी वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता है क्योंकि मौलिक रूप से चाहे जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संशोधन, खाद उत्पादन आतंकवाद से लेकर स्वास्थ्य गरीबी, भूख जैसी पारंपरिक समस्या क्यों ना हो, हर जगह विज्ञान की महती भूमिका है। आज के समय में आपके पास बहुत सारे मौके और करियर है निजी क्षेत्र ने व्यापक संभावनाओं के साथ अपने आप को एक महान नियोक्ता के रूप में विकसित किया है। देश में स्वरोजगार उद्यमिता एवं स्टार्टअप की असीम संभावना है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में हमारे देश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। हमारे स्नातकों की पूरी दुनिया में मांग है, हमने अपने ज्ञान और कौशल के साथ दुनिया की मदद करके एक बड़ा व्यवसाय किया है। उन्होंने उपाधि धारको को ईमानदारी के साथ कड़ी मेहनत करने की सलाह दी ।
डीएससी की मानद उपाधि से सम्मानित होने वाले बीएचयू के प्रोफेसर उदय प्रताप सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फोरम में अमेरिका के खिलाफ लड़ाई लड़कर हमने नीम का पेटेंट वापस कराया, इस पर मेरा 4 शोध पत्र प्रकाशित था, जिसके कारण यह वापस हुआ। कुलपति प्रो. डॉ. राजाराम यादव ने कहा कि प्रयास है कि विश्वविद्यालय प्रदेश ही नहीं, देश के समस्त विश्वविद्यालयों की पंक्ति में सच्चे अर्थों में प्रमुख स्थान प्राप्त करे।
दीक्षांत समारोह में पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद, प्रो.कीर्ति सिंह, डॉ0 यू पी सिंह, डा.राधेश्याम सिंह ,डॉ राजीव प्रकाश सिंह, डॉ. समर बहादुर सिंह ,डॉ विजय सिंह डॉ. आलोक सिंह डॉ. गायत्री प्रसाद सिंह, प्रो. विलास ए तभाने, प्रो. बी.बी. तिवारी प्रो. रंजना प्रकाश, प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. अविनाश पाथर्डीकर प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो. बी.डी. शर्मा, विधायक बृजेश सिंह,डॉ. मनोज मिश्र डॉ. राजीव सिंह, डॉ.वीरेन्द्र विक्रम यादव, डॉ. राकेश यादव, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. अवध बिहारी सिंह, डॉ. विजय प्रताप तिवारी, डॉ. अनुराग मिश्र, सुरेन्द्र त्रिपाठी, डॉ. के.एस. तोमर, अमलदार यादव, डॉ. संजय श्रीवास्तव सहित काफी संख्या में प्रोफेसर व विश्वविद्यालय के छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

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