दीक्षांत समारोह ! पदक पाकर खिले मेधावियों के चेहरे

वाराणसी (उत्तर प्रदेश),02 नवम्बर 2018। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के सुसज्जित पंडाल में कुलाधिपति व राज्यपाल राम नाईक की अध्यक्षता में आज विश्वविद्यालय का 36वां दीक्षांत समारोह मनाया गया। दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सदस्य व संस्कृत विद्वान प्रो. उमा चंद्रशेखर वैद्य रहे। अध्यक्ष व मुख्य अतिथि ने मेधावियों को स्वर्ण पदक और उपाधि प्रदान कर उनको बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।मेधावी छात्रों ने धोती-कुर्ता व टोपी धारण कर तो छात्राओं ने साड़ी-दुपट्टा और टोपी पहनकर पदक धारण किया। समारोह में शास्त्री, आचार्य के 35 मेधावियों को 60 पदक और 24696 छात्रों को उपाधियां प्रदान की गयीं । नेपाल निवासी छात्र लेखनाथ पौडयाल इस बार सर्वाधिक आठ पदक पाकर सर्वोच्च रहे। जिस समय उन्होंने पदक लिया उस समय तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गुंज उठा। इस अवसर पर संस्कृत विद्वान प्रो. भगीरथ प्रसाद त्रिपाठी को डी लिट् की उपाधि प्रदान की गई। अपने सम्बोधन में कुलाधिपति ने कहा कि काशी के तीन रत्न रहें जिन्होंने यहां की गरिमा बढ़ाई है। पहले व्यक्ति महामना पं.मदनमोहन मालवीय रहे जिन्होंने बीएचयू की स्थापना की। दूसरे राष्ट्र रत्न शिवप्रसाद गुप्त, जिनके सहयोग व प्रेरणा से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की स्थापना हुई और तिसरे डा. सम्पूर्णानन्द जिन्होंने संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की। राज्यपाल ने छात्रों से कड़ी मेहनत और प्रतिस्पर्धा से जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।उन्होंने सफलता के लिए शार्ट कट छोड़ ईमानदारी से अपने परिश्रम के बल पर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का मंत्र दिया। दीक्षांत समारोह में जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह, काशी विद्यापीठ वाराणसी के कुलपति प्रो. टीएन सिंह, संस्कृत विवि के पूर्व कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे सहित काफी संख्या में विद्व जन व उपस्थित रहे।


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