कार्यशाला ! शिक्षण प्रक्रिया को जिज्ञासु व विकासोन्मुखी बनाने की आवश्यकता पर बल

गाजीपुर(उत्तर प्रदेश),25 अक्टुबर 2018। शिक्षा प्रक्रिया को रुचिकर व सर्वग्राही बनाने हेतु शिक्षकों की विशेष कार्यशाला का आयोजन आज क्षेत्र के प्रियंका मेमोरियल इंटरनेशनल स्कूल युसूफपुर खड़बा में किया गया। दिल्ली से आए विषय विशेषज्ञ आबिद अख्तर अंसारी व उनके सहयोगी मुनिश अहमद ने आज के बढ़ते पाठ्यक्रम और जटिल शिक्षण प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए कहा कि बढ़ते बदलते परिवेश में भारी भरकम शिक्षण बोझ के चलते बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है और वे हीन भावना से ग्रसित हो रहे हैं। इसके कारण उनका यथोचित विकास अवरुद्ध हो रहा है। आज कक्षा के बोझिल वातावरण को सहज बनाने में शिक्षक की भूमिका सर्वोपरि है।शिक्षक ही बच्चों की हीन भावना को दूर कर सकते हैं। इसके लिए शिक्षकों को प्रेरित किया कि वे कक्षा में इस प्रकार पहुंचे की कक्षा का बोझिल वातावरण भी खुशनुमा हो जाये। उनके कक्षा में पहुंचने पर बच्चे डरें नहीं बल्कि खुश होकर उनका स्वागत करें कि आज उन्हें कुछ नया सिखने का अवसर मिलेगा। बाल मनोविज्ञान पर चर्चा करते हुए बताया कि हीन भावना से ग्रसित बच्चों को प्रोत्साहित कर मुख्यधारा से जोड़कर उनकी प्रतिभा को निखारना शिक्षक का कर्तव्य है। इसलिए बच्चों के पाठ को ऐसे ढंग से प्रस्तुत करें कि उनकी रुचि व जिज्ञासा पाठ में बढ़े। बच्चों की बुद्धि के अनुरूप शिक्षण करने से उनका मानसिक तनाव तो कम होगा ही, साथ में बच्चे पाठ को मनोयोग से ग्रहण करने में सक्षय होंगे।इससे उनका सर्वांगीण विकास होगा और वे विषय वस्तु को आसानी से ग्रहण कर सकेंगे। शिक्षण के समय शिक्षक का व्यवहार मधुर होना चाहिए कि बच्चे अपनी परेशानी बेझिझक बता सकें और शिक्षक को उनकी वुद्धि के अनुरूप समझा कर उन्हें संतुष्ट करना होगा तभी जाकर बच्चों का शिक्षण के प्रति आकर्षण बढ़ेगा और उनमें शिक्षा के प्रति ललक जागृत होगी। कार्यशाला में प्रबन्धक कृष्ण दत्त द्विवेदी, प्रधानाचार्य मधूसूदन दूबे, शैलेष सिंह सहित विद्यालय के सभी शिक्षकगण उपस्थित रहे।


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