राष्ट्रीय पुलिस स्मारक को राष्ट्र को समर्पित

नयी दिल्ली,21 अक्टूबर 2018। राष्ट्रीय पुलिस स्मारक को राष्ट्र को समर्पित करते हुए आज प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें राष्ट्र सेवा और समर्पण की अमर गाथा के प्रतीक, इस राष्ट्रीय पुलिस स्मारक को देश को समर्पित करने का अवसर मिला है। साथ ही साथ उन्होंने काफी देरी से इसके बनने पर कहा कि क्या कारण रहा कि राष्ट्रीय पुलिस स्मारक बनने में 70 वर्ष लग गये, अगर पहले की सरकारों ने दिल से प्रयास किया होता तब यह स्मारक पहले ही बन गया होता परन्तु पूर्ववर्ती सरकारों ने आडवाणी जी द्वारा स्थापित पत्थर पर धूल जमने दी। कहा कि जब वर्ष 2014 में राजग की सरकार बनी तो बजट आवंटन किया और आज ये भव्य स्मारक देश को समर्पित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने समय पर लक्ष्यों को प्राप्त करने की कार्यसंस्कृति विकसित की है।
प्रधानमंत्री ने पुलिस स्मृति दिवस पर देश की सुरक्षा में समर्पित सैनिकों एवं उपस्थित शहीदों के परिवारों को नमन करते हुए कहा कि आज का दिन आप की सेवा के साथ-साथ, आपके शौर्य और उस सर्वोच्च बलिदान को याद करने का है, जो पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की परिपाटी रही है।प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का यह दिन देश में आपदा प्रबंधन में जुटे, किसी प्राकृतिक संकट या हादसे के समय, राहत के काम में जुटने वाले उन जवानों को भी याद करने का है, जिनकी सेवा का लोगों को पता भी नहीं चलता कि बिषम परिस्थितियों में कोई इमारत गिरने पर, नाव हादसा होने पर, आग लगने पर, रेल हादसा होने पर, राहत के काम की कमान संभालने वाले लोग कौन थे।
अपने सम्बोधन में मोदी ने देश के नक्सल प्रभावित जिलों में ड्यूटी पर तैनात जवानों से कहा कि आप बेहतरीन कार्य करते हुए शांति स्थापना की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में डटे साथियों का शौर्य और बलिदान भी अब शांति के रूप में दिखने लगा है। शांति और समृद्धि का प्रतीक बन रहे पूर्वोत्तर के विकास में उनका भी अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है।


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