दहेज उत्पीड़न ! गिरफ्तारी का मामला पुलिस पर ,पर पुलिस को बताने होंगे गिरफ्तार करने या न करने के उचित कारण

नई दिल्ली, 14 सितम्बर 2018 । आईपीसी की धारा 498 ए (दहेज प्रताड़ना मामलों)में सुप्रीम कोर्ट ने आज अहम फैसला सुनाया है। उच्चतम न्यायालय ने ऐसे केसों में गिरफ्तारी करने या न करने का अधिकार पुलिस के सुपुर्द कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस ए.एम.खान विलकर और जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने पुराने फैसले में संशोधन करते हुए कहा है कि मामले की शिकायत की जांच के लिए कमेटी की ज़रूरत नहीं है। पुलिस को ज़रूरी लगे तो वह आरोपी को गिरफ़्तार कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के लिए अग्रिम ज़मानत का विकल्प खुला हुआ है। कोर्ट ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाते हुए कहा कि विक्टिम प्रोटेक्शन के लिए ऐसा करना जरूरी है। दरअसल, इसी साल अप्रैल माह में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।इसके अनुसार दहेज प्रताड़ना के मामलों में अब पति या ससुराल वालों की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी। दहेज प्रताड़ना यानी आईपीसी की धारा 498-ए के दुरुपयोग से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाते हुए इस सिलसिले में कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं।


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