मुद्दा ! एससी एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में शांतिपूर्ण रहा भारत बंद

लखनऊ(उत्तर प्रदेश),06 सितम्बर 2018। एससी एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ सवर्णों की तरफ से बुलाए गए भारत बंद का देशभर में व्यापक असर देखने को मिल रहा है।आमतौर पर देश या प्रदेश में बंद राजनीतिक दलों द्वारा ही होते हैं, परन्तु आज 6 सितम्बर को राजनीतिक दलों के बगैर ही शांतिपूर्ण तरीके से भारत बंद सफर रहा। देश के प्रमुख शहरों में दलीय सीमा तोड़ लोगों ने एकजुट होकर इसका विरोध व्यक्त किया। माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बावजूद केन्द्र सरकार ने वोट की राजनीति के चलते देश की जनता को छलने का काम किया जिससे सभी मर्माहत रहे और इसके विरोध में देश के लोगों ने बगैर दबाव अथवा आग्रह के स्वेच्छा से बंद में सहयोग किया। आज इस बंद के चलते सामान्य वर्ग के साथ मुसलमान और ओबीसी वाले भी साथ रहे। लोगों का प्रश्न रहा कि केन्द्र सरकार ने जब सबका साथ सबका विकास का नारा दिया है तो फिर आरोपों की जांच के बगैर ही एससी एसटी एक्ट के तहद गिरफ्तारी क्यों? दहेज प्रताड़ना, गैंगरेप जैसे प्रकरणों में भी आरोपों की जांच के बाद ही गिरफ्तारी होती है। जांच एजेंसियां पर्याप्त सबूत जुटाने के बाद ही आरोपी को गिरफ्तार करती हैं। देश में मजबूत होते लोकतंत्र में जाति के आधार पर किसी को भी अपमानित नहीं किया जा सकता। इसलिए एससी एसटी एक्ट बनाया गया, जिसके सख्त प्रावधान है, लेकिन न्याय की भी मांग है कि आरोपों की जांच भी होनी चाहिए। लोकतंत्र में तो एससी एसटी वर्ग के लोग भी आज उच्च पदों पर तैनात हैं,तो वहीं राजनीति में मंत्री, मुख्यमंत्री, केन्द्रीयमंत्री और आज देश के राष्ट्रपति तक हैं। ऐसे में आज की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था में किसी की भी हिम्मत नहीं जो आरोपी को बचा सके। संविधान में जब सभी को समान अधिकार है तो फिर किसी के साथ अन्याय भी नहीं होना चाहिए। 6 सितम्बर के भारत बंद से देश के राजनेताओं को भी सबक लेना चाहिए कि वे ऐसा कोई कार्य नहीं करे, जिससे समाज का एक वर्ग नाराज होता हो। इसे राजनेताओं की वोट की मजबूरी ही कहा जाएगा कि 6 सितम्बर के भारत बंद के समर्थन में कोई भी नेता सामने आने से बचता रहा। भाजपा के लोग जनता से बचते रहे। लोगों का कहना है कि इसमें कांग्रेस व विपक्षी दलों की भी मिली भगत रही, तभी तो जब एक्ट में संशोधन वाला प्रस्ताव संसद में सरकार ने रखा, तब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भी समर्थन किया था। ऐसे में कांग्रेस व विपक्षी दल अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते और भविष्य में उनको इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। गाजियाबाद में उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया है कि राजनीतिक पार्टियों द्वारा आरक्षण के मुद्दों पर वोटों को बटोरने को लेकर रोटियाँ सेंकने में लगी है। जिसका असर अन्य जातियों पर पड़ रहा है। अभी हाल ही में उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली द्वारा दिये गये एससी एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करने के उपरांत पहले जांच होने के बाद ही गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाये, को लोक सभा में प्रस्ताव पारित कर कानून को बदलने का कार्य किया है जिसमें सवर्ण व पिछड़े समाज के व्यक्तियों को एससी एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज होने पर पहले गिरफतारी फिर जांच का प्रावधान है,जो पूरी तरह गलत है। इससे सामान्य व पिछड़े समाज के व्यक्तियों को डर के साये में जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सवर्ण समाज के व्यक्तियों ने ज्ञापन देकर संशोधन विधेयक को पुनः समीक्षा करने हेतु लोक सभा को भिजवाने का आग्रह राष्ट्रपति से किया है। प्रदेश के साथ ही साथ विभिन्न प्रदेशों में भी केन्द्र सरकार द्वारा किये गए संशोधन का विरोध जमकर किया गया और देश को तोडऩे वाले इस काले कानून में परिवर्तन की मांग की गयी। बिहार से मिली जानकारी के अनुसार कई जगहों पर रोकी गई ट्रेनें। बिहार में अधिकांश बाजार बंद रहे और भारत बंद का आह्वान कर लोग जगह-जगह प्रदर्शन करते रहे , वहीं मुंगेर और दरभंगा में ट्रेनों को रोक दिया गया है। जबकि, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में लोग सड़कों पर उतर कर इसका विरोध किये । मध्य प्रदेश में पिछली बार हुई भारी हिंसा को देखते हुए सुरक्षा का भारी बंदोबस्त किए गए हैं। मध्य प्रदेश पुलिस के मुताबिक, एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर राज्य के 35 जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। यहां पर सुरक्षाबलों की 34 कंपनियां और 5000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया । इसके साथ ही, कई जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई । गौरतलब है कि आज कथित तौर पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार अधिनियम को लेकर लाए गए अध्यादेश के खिलाफ सवर्ण समुदाय ने भारत बंद किया है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर किसी संगठन द्वारा बंद का आह्वान नहीं किया गया है। पुलिस-प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में हुई हिंसा और कई लोगों की मौत के बाद अब प्रशासन ने ऐसे क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों में सुरक्षा एजेंसियां बंद को लेकर पैनी नजर रखे हुए हैं।


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