अनदेखी ! गलियों और सड़कों पर खुले आम चीयर्स ,भंग हो रही काशी की शालीनता
वाराणसी (उत्तर प्रदेश),04 सितंबर 2018। महादेव के त्रिशूल पर बसी व मां गंगा के पवित्र जल से सिंचित आध्यात्मिक नगरी काशी प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अपनी शान खोने लगी है। शहर में फैली शराब की दुकानों पर पीने के प्रतिबंध के बावजूद शहर के विभिन्न इलाकों में संचालित दुकानों पर जहां दिन ढलते ही मयखाने सजने लगते हैं। नियमानुसार बार और मॉडल शॉप को छोड़ कहीं भी शराब पीने-पिलाने की इजाजत कानून नहीं देता परन्तु इस धर्मिक शहर की हालत यह है कि प्रायः हर अंग्रेजी व देशी शराब तथा बीयर की दुकानों पर लोग खड़े होकर क्या आराम से बैठ कर चखना के साथ जाम टकराते मिल जाएंगे। यही वजह है कि शराब की दुकानों के आस पास चखने के विभिन्न रुपों के साक्षात दर्शन ठेले व खोमचे वालों की दुकानों पर होता हैं। चाहे वह कमच्छा हो, राम कटोरा हो, महमूरगंज हो या फिर लक्सा, मिंट हाउस हो चाहे सोनिया। जहां कहीं भी अंग्रेजी व देशी शराब और बीयर की दुकाने साथ-साथ हैं वहां तो ऐसा माहौल होता है मानों लाइसेंसी बार खुला है। लक्सा थाने के समीप आधुनिक त्रिशक्ति के रुप में लक्सा तिराहे पर देशी शराब, अंग्रेजी शराब और बीयर तीनों ही दुकानें सजी हैं। शाम के समय इन दुकानों पर बेखौफ पियक्कड़ों की अच्छी खासी महफिल सजती है। कमोबेश यही हाल कमच्छा ,महमूरगंज, सोनिया, रामकटोरा और मिंट हाउस का भी है। बीच सड़क पर लोग गाड़ी पार्क कर पीने-पिलाने में मशगूल रहते हैं। कभी कभी तो सुबह से ही शुरू हो जाता है पीने-पिलाने का दौर। उधर कमच्छा पॉवर हाउस के समीप शंकुलधारा पोखरा मार्ग के
देशी शराब की दुकान परतो सुबह से ही पीने वालों की लाइन लग जाती है। आर्थिक दृष्टि से कमजोर तबके के लोग सुबह-सुबह ही पहुंच जाते हैं। वहीं जलकल की चहारदिवारी के किनारे ही उनका मयखाना सज जाता है। इसमें महिला-पुरुष सभी वर्ग के लोग रहते हैं। क्षेत्रीय लोगों ने कई बार इसकी शिकायत आबकारी से लेकर जिला प्रशासन तक की पर कोई फर्क नहीं पड़ा। यह हाल तब है जब देशी शराब के ठेके से चंद कदम दूर ही पुलिस की पिकेट है। लेकिन उन्हें भी इससे कोई सरोकार नहीं। बता दें कि इस ठेके से कुछ ही दुरी पर यूपी बोर्ड से संबद्ध इंटर कॉलेज है तो यहीं एनी बेसेंट द्वारा स्थापित सेंट्रल हिंदू स्कूल है, एक अन्य सीबीएसई से संबद्ध हाईस्कूल है। थोड़ा और आगे बढ़ें तो शंकुल धारा पोखरे के समीप एक सरकारी प्राथमिक स्कूल है। उससे पहले सीबीएसई से संबद्ध प्राइमरी स्कूल है। ऐसे में स्कूल आने-जाने वाले लड़के-लड़कियों के साथ साथ टीचर्स भी परेशान हैं। खास तौर पर महिला टीचर्स किसी तरह से जल्दी-जल्दी उस रास्ते से निकलना चाहती हैं।
डीएम ने आबकारी विभाग को निर्देश दिया है कि वह शराब की दुकानों पर बोर्ड लगवाए जिस पर लिखा हो यहां शराब पीना मना है। यही नहीं यूपी में जब बीजेपी सरकार आई तो मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने सख्त निर्देश जारी किया था कि शराब की दुकानों पर पीने-पिलाने का दौर न चले। इसके लिए स्पेशल टास्क फोर्स तक का गठन किया गया परन्तु शराब माफियाओं के सामने सभी बौने हो गये। सीधे तौर पर कहा जायें कि बनारस मेंं शराब माफिया आबकारी,पुलिस व प्रशासन पर भारी पड़ रहें हैं तो गलत नहीं होगा।
स्रोत – रंजीत गुप्ता
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