दलितों के वोट बैंक हेतु, गैरदलितों के विरुद्ध लाया गया अध्यादेश भाजपा के लिए होगा घातक

गाजीपुर (उत्तर प्रदेश),08 अगस्त 2018।
माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा एससी- एसटी एक्ट पर दिये गये फैसले के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होते ही आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी हेतु केंद्र सरकार द्वारा लाये गये अध्यादेश के विरुद्ध एकत्रित गैर दलित संगठनों ने आज जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन कर जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर विरोध प्रदर्शन किया। एकत्रित गैर दलित संगठनों ने इस आंदोलन को “अस्तित्व बचाओ” आंदोलन का नाम देते हुए लोगों को इससे जुड़ने का आग्रह किया गया। कहा कि केन्द्र सरकार का यह निर्णय आत्मघाती होगा।
अपने सम्बोधन में क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कहा कि वोट बैंक की भूखी, अंधी सरकार द्वारा यह काला कानून लाकर लोकसभा में पारित भी किया जा चुका है। यदि राज्यसभा में भी यह पारित हो जायेगा तो यह कानून का रूप ले लेगा, जिसको कतई बर्दाश्त नही किया जाएगा। दलित वोट प्रेम में अंधी सरकार 22.5% के चक्कर मे 77.5% के साथ घोर अन्याय करने पर तुली हुई है। इस अध्यादेश ने सामान्य व पिछड़ो के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न कर दिया है। वोट की भूख में कोई भी संसद में इसके विरुद्ध बोलने को तैयार नही है, लेकिन हम समय आने पर उसका माकूल जवाब देंगे।
भूमिहार महासभा के महासचिव अधिवक्ता मारुती राय ने कहा कि अपने अस्तित्व को बचाने के लिए एक मंच पर संगठित होकर इसका पुरजोर विरोध करना होगा। जनता की अदालत से बड़ी कोई अदालत नही, तो 77.5 फिसदी जनसंख्या इसका कड़ा बिरोध करेगी और इसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ेगा।
यादव महासभा के अधिवक्ता लल्लन यादव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के विद्वान न्यायाधीशों से भी विद्वान हो चुके पांचवी फेल लोग भी अब संसोधन की बात करते है। कहा कि दलित उत्पीड़न के 90 फीसद मामले फर्जी पाए जाते है। सरकारी आर्थिक लाभ व दूसरों को परेशान करनेवाले ईष्यावश इस एक्ट का लोग दुरपयोग करते है और बाद में मोटी रकम ले मुकदमे वापस भी ले लेते है। केन्द्र सरकार के इस निर्णयको कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। संसद में इसका विरोध न करने वाले सांसदों को जनता ऐसा सबक सिखाएगी कि वे जीवन भर याद रखेंगे ।
पाल महासभा की नेत्री विभा पाल ने कहा कि यदि कोई दलित उत्पीड़न करता है तो वह निश्चय ही शर्मनाक है और उसकी गिरफ्तारी होनी चाहिये परन्तु वगैर जाँच आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए।ऐसी अनेकों घटनाएं हुई हैं जिसमें दलित द्वेष या लालच वश ऐसा कर समाज में द्वेष पैदा करते हैं।
पठान महासभा से सम्बद्ध अधिवक्ता खैरुल इमाम ने कहा कि न्यायलय में आने वाले दलित उत्पीड़न के सभी मुकदमों को मैं ध्यान से देखता हूं, अधिकांश मामले फर्जी मिलते है। व्यापारी नेता असलम खान ने कहा कि यदि यह काला कानून हम सब पर थोपा गया तो बहुमत में आयेे यही नेता आगामी चुनाव में जमानत बचाने को भी तरसेंगे।
दलित वोट के लिए अंधी भाजपा को अन्य समाज की अनदेखी अब महँगी पड़ेगी।यह कहना है कुशवाहा महासभा के सुनील कुशवाहा का । उन्होंनेे कहा कि मैं स्वम इसका भुक्तभोगी हूं। दलित पडोसी द्वारा किये जा रहे अवैध निर्माण का विरोध करने पर उसने पूरे मोहल्लेवासियों पर फर्जी एससी/एसटी के तहत फंसा दिया, जो विवेचना में शुन्य पाया गया। इसके बावजूद उस दलित परिवार ने एक के बाद एक करके चार फर्जी मुक़दमें लिखा डाले। हाईकोर्ट ने भी माना की एक ही तरह की घटना को बस समय बदल बदल दर्शाया गया है और विद्वान न्यायाधीशों द्वारा दलित परिवार को तलब कर लिया गया पर वे आज तक भाग रहे है। वगैर दलित उत्पीड़न के ही हमें कितनी परेशानी और यातना झेलनी पड़ी, मुझसे बेहतर और कोई नहीं समझ सकता।
भाजपा नेता व चौधरी महासभा के श्याम चौधरी ने कहा कि वे भले ही भाजपा की राजनीति करते हैं, हम भाजपा समर्थक है पर अंधे और बहरे नहीं हैं। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के इस फैसले से जरा भी सहमत नहीं है। वे इसका पुरजोर विरोध करते हैं। जांच पूर्ण होने तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए। उपरोक्त संगठनों के अलावा अग्रवाल समाज, कायस्थ समाज, विश्वकर्मा समाज सहित अन्य गैर दलित संगठनों ने भी समर्थन दिया है।
अस्तित्व बचाओ आंदोलन की प्रमुख मांगो में- माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने, एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए फर्जी मुकदमा करने वाले पर कठोर करवाई करने व सरकार द्वारा प्राप्त सहायता राशि की वसूली करने, गवाही से मुकरने पर अर्थ दण्ड तथा जेल भेजने तथा सरकारी सेवा में पदोन्नति को पूर्णतया समाप्त कर, योग्यता तथा वरीयता को प्राथमिकता देने की मांगे प्रमुख थी। , उपस्थित वक्ताओं ने राष्ट्र के चतुर्थ स्तम्भ माने जाने वाले मीडिया के माध्यम से वोट की भूखी, अंधी और बहरी केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि यह काला कानून वापस नही हुआ तो हम सब सपरिवार सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
अन्त में “अस्तित्व बचाओ” बैनर तले यह निश्चित किया गया कि संवैधानिक तरीके से 10 अगस्त को मशाल जुलूस गांधी पार्क से संध्या साढ़े चार बजे से निकाला जायेगा और यह जुलूस कचहरी पहुंच कर जिलाधिकारी के माध्यम से अपना ज्ञापन राष्ट्रपति, सभापति लोकसभा व राज्यसभा को सौंपेगा। बैठक में रजनीश मिश्रा, रामावतार यादव, वैभव सिंह, अमित मोहन पांडेय, मोंटी बागची, नागेंद्र कुशवाहा, अंजनी कुशवाहा, मुश्ताक अली सहित काफी संख्या में नेतागण उपस्थित रहे।


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