कवि गोष्ठी में कवियों ने बिखेरी छटा 

आज कमाने में रोटी, सरक जाती है लंगोटी’


गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व जिलाध्यक्ष विनोद उपाध्याय के डेढ़गाँवा आवास पर काव्य-गोष्ठी एवं गीत-संगीत का आयोजन सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि विनय राय बबुरंग ने की। 

        कवि-गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से वर्तमान परिवेश को रेखांकित किया, तो गायकों ने अपने गीत-संगीत से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।

         कार्यक्रम का शुभारंभ संजय पाण्डेय की वाणी वन्दना से हुआ।युवा कवि शशांक शेखर पाण्डेय ने गुरु वन्दना ‘ गुरु दया बनाये रखना सुनाकर श्रोताओं में गुरु के प्रति समर्पण का भाव जागृत किया। गीतकार नागेश कुमार मिश्र ने ‘अँधेरी रातों का बादल हुआ हूँ ‘ सुनाकर अतीव प्रशंसा अर्जित की। व्यंग्यकार अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने – कब रोक सकीं दुर्गम राहें, मंजिल खुद उसे बुलाती है फैलाकर दोनों बाहें’ सुनाकर श्रोताओं को आनन्दित किया तो सुपरिचित व्यंग्यकार आशुतोष श्रीवास्तव ने ‘आज कमाने में रोटी, सरक जाती है लंगोटी’ सुनाकर बेरोजगारी की समस्या पर श्रोताओं को  गुदगुदाया। वहीं चिदाकाश सिंह, संजय पाण्डेय, प्रभाकर त्रिपाठी, विजय पाल आदि ने गीत, गजल एवं भजन सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया।

        अध्यक्षीय काव्य-पाठ में विनय राय बबुरंग ने * ‘सांच बोलल आ लिखल कठिन काम ह, सांपन के बीच चलल कठिन काम ह, कलम के धार के केहू रोक न सकल, चित्र खिंचल समाज क कवि क काम ह’* सुनाकर कलम की शक्ति का एहसास कराया।

        कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शशिकांत उपाध्याय, संतोष कुशवाहा, मीरा वर्मा, राजेश कुशवाहा, संजय राय आदि उपस्थित रहे। संचालन संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ एवं धन्यवाद ज्ञापन ओमप्रकाश उपाध्याय ने किया।

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