नहीं रहे वरिष्ठ साहित्यकार अवधेश प्रीत 

इनकी कहानियों पर दूरदर्शन ने बनाई थी टेलीफिल्म 


गाजीपुर। हिंदी के ख्यातिलब्ध कथाकार एवं पत्रकार अवधेश प्रीत का 12 नवम्बर 2025 को हृदयाघात से पटना में निधन हो गया। 

     जनपद के भांवरकोल क्षेत्र के तरांव गांव के मूल निवासी अवधेश प्रीत का जन्म 13 जनवरी 1958 को हुआ था। प्रारम्भिक शिक्षा पैतृक गांव में पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा कुमाऊं विश्वविद्यालय (उत्तराखंड) से प्राप्त की थी। उन्होंने साहित्य-लेखन व रंगकर्म की शुरुआत  उधम सिंह नगर से की। 1958 से बिहार के पटना में दैनिक हिंदुस्तान नामक समाचार पत्र के कई दशक तक सह संपादक के रूप में कार्य करते हुए सेवानिवृत्ति के पश्चात स्वतंत्र साहित्य-सृजन में लगे थे। 

       उनकी प्रकाशित कृतियों में ‘अशोक राजपथ’, रूई लपेटी आग'(उपन्यास), ‘हस्तक्षेप’, ‘नृशंस’, ‘हमजमीन’, ‘कोहरे में कंदील’, ‘चांद के पार एक चाभी’, ‘अथ कथा बजरंगबली’ (कहानी संग्रह) आदि प्रमुख हैं। देश की तमाम पत्र-पत्रिकाओं में  उनकी कहाननियां, समीक्षाएं, लेख आदि प्रकाशित होते रहे हैं। कई कहानियों के अनुवाद उर्दू, अंग्रेजी, मराठी और गुजराती में भी हो चुका है। कुछ कहानियों के मंचन भी हुए हैं जिनमें ‘नृशंस’ (एन.एस.डी. दिल्ली), ‘बाबूजी की छतर’ (एक्ट वन दिल्ली), ‘ग्रासरूट’ (थिएटर यूनिट पटना), ‘हमजमीन’ (अक्षरा पटना, इंटिमेट थिएटर इलाहाबाद), ‘तालीम’ (रंगश्री पटना) और ‘चांद के पार एक चाभी’ (थिएट्रान लखनऊ) उल्लेखनीय हैं। ‘अली मंजिल’ और ‘अलभ्य’ नामक कहानियों पर दूरदर्शन द्वारा टेली फिल्म का निर्माण व प्रसारण भी हो चुका है। इन्हें ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी कथा-सम्मान’, ‘सुरेंद्र चौधरी कथा-सम्मान’, ‘विजय वर्मा कथा-सम्मान’, फणीश्वरनाथ रेणु कथा-सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

     अवधेश प्रीत के आकस्मिक निधन से साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति हुई है। उनके निधन पर शोक व्यक्त करने वालों में प्रो.राम बदन राय, डॉ. गजाधर शर्मा ‘गंगेश’ ओम धीरज, हेमंत श्रीवास्तव ‘शिशिर’ सेवानिवृत्त न्यायाधीश-पटना हाई कोर्ट), डॉ. प्रतिभा सिंह आदि प्रमुख रहे।

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