उफान पर गंगा, तटवर्ती निचले इलाकों में एक बार फिर मची तबाही
गाजीपुर। पतित पावनी मां गंगा ने अगस्त माह में ही दूसरी बार फिर से रौद्र रूप धारण कर लोगों की माथे पर चिंता की लकीरें डाल दिया है। अगस्त माह के पहले सप्ताह के बाद गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे कम होकर स्थिर हो गया था और निचले इलाकों व तटवर्ती क्षेत्रों में बसे लोगों ने राहत की सांस ली थी बाढ़ का खतरा अब टल गया है। वहीं गंगा के तटवर्ती इलाकों व निकटवर्ती गांवों तक बाढ़ का पानी फैलने से जहां लोगों को अपने आशियाने छोड़ अन्य ठौर ठिकाना का सहारा लेना पड़ा, वहीं पालतू पशुओं के लिए चारे की समस्या भी हो गयी थी। गंगा की तलहटी में लगाईं गई सब्जियों की फसल तो कब की पानी में डूबकर समाप्त हो गई थी।
बताते चलें कि कई वर्षों बाद इस बार गंगा का रौद्र रूप देखने को मिला था। मंगलवार पांच अगस्त तक जलस्तर लगातार बढाव पर रहा और पिछले कई वर्षों के अपने रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए जलस्तर 64.690 मीटर तक जा पहुंचा। अगस्त के दूसरे सप्ताह से जल स्तर में कमी होने लगी और देखते देखते जलस्तर चेतावनी बिन्दू से भी नीचे जा पहुंचा। इससे लोगों ने राहत की सांस ली थी कि अब खतरा टल गया है, लेकिन यह सोच ज्यादा समय तक नहीं टिकी और अंतिम सप्ताह में गंगा ने एक बार फिर अपना रुप परिवर्तन शुरू कर दिया।
वर्तमान समय में गंगा नदी का जलस्तर लगातार रफ्तार पकड़ते हुए खतरे के निशान को पार कर उपर बढ़ने लगा है। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने घाट की सीढ़ियों को अपने आगोश में लेने के बाद अब उपर की तरफ फैलना शुरु कर दिया है। मैदानी इलाकों में काफी खेत गंगा में समाहित हो गये हैं। बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन एलर्ट मोड पर है। प्रशासनिक अधिकारीगण लगातार अपडेट ले रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी भी की जा रही है ताकि प्रभावित लोगों को हर संभव मदद दी जा सके।
बुधवार 27अगस्त को सुबह 8 बजे गंगा का जलस्तर 63.110 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर करीब चार सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति रफ्तार से बढ़ रहा था। केन्द्रीय जल आयोग की स्थानीय इकाई के अनुसार, 27.08.2025 को संध्या तीन बजे जलस्तर 63.380 मीटर है और तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे के बढ़ाव जारी है। वर्तमान समय में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ते गंगा के पानी ने सहायक नदियों का स्तर भी बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर निचले व समीपवर्ती इलाकों में दिख रहा है। जिले के सैदपुर, करंडा, जमानियां, सदर, मुहम्मदाबाद, रेवतीपुर और भांवरकोल ब्लॉक के गंगा के समीपवर्ती क्षेत्रों में पानी तेजी से फैलने लगा है। खेत, रास्ते और घर पानी में डूबने की कगार पर हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
ज्ञातव्य है कि गंगा जिले में बाढ़ की स्थिति का निर्धारित मापदंड के अनुसार, सामान्य जलस्तर 59.906 मीटर, निम्न स्तर ( चेतावनी बिंदु) 62.100 मीटर, मध्य स्तर (खतरा बिंदु) 63.105 मीटर तथा उच्च बाढ़ स्तर 65.220 मीटर निर्धारित है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.530 मीटर, वर्ष 2021 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.680 मीटर, वर्ष 2022 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.390 मीटर, वर्ष 2023 बाढ़ का उच्च जलस्तर 61.700 मीटर और 2024 बाढ़ का उच्च जलस्तर 63.670 रहा था।
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