बाढ़ के पिछले रिकार्ड को ध्वस्त कर स्थिर हुई गंगा

गाज़ीपुर। सावन के पहले पखवारे तक पड़ी भयंकर गर्मी और उमस से बेहाल लोगो को सावन के दुसरे पखवारे ने काफी राहत दी। सावनी फुहार और बरसात ने भयंकर गर्मी और सूखे की मार झेल रहे प्राणियों में नवजीवन का संचार किया। पानी की कमी से काफी कम क्षेत्रफल में लगायी गयी धान की फसल भी हरियाली से झूम रही है। तेज गति से हुई बरसात में किसानों के चेहरों पर खुशी ला दी। रविवार से शुरू हुई सावनी फुहार मंगलवार शाम त जारी रही। सुहाने मौसम का लुत्फ उठाते हुए एक तरफ जहां लोग प्राकृतिक सौन्दर्य का आनन्द ले रहे हैं, वहीं गंगा किनारे व समीपवर्ती क्षेत्रों में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने तबाही मचाई हुई है। 


        बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन एलर्ट मोड पर है। प्रशासनिक अधिकारीगण लगातार अपडेट ले रहे हैं और नाव द्वारा प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी भी की जा रही है ताकि प्रभावित लोगों को हर संभव मदद दी जा सके। गंगा के तटवर्ती इलाकों व निकटवर्ती गांवों तक बाढ़ का पानी फैलने से जहां लोगों को अपने आशियाने छोड़ अन्य ठौर ठिकाना का सहारा लेना पड़ा है वहीं पालतू पशुओं के लिए चारे की समस्या भी हो रही है। गंगा की तलहटी में लगाईं गई सब्जियों की फसल तो कब की पानी में डूबकर समाप्त हो गई है। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने घाट की सीढ़ियों को अपने आगोश में लेने के बाद अब उपर की तरफ फैलना शुरु कर दिया है। मैदानी इलाकों में काफी खेत गंगा में समाहित हो गये हैं। 

   कई वर्षों बाद इस बार गंगा का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। मंगलवार पांच अगस्त तक जलस्तर लगातार बढाव पर रहा और पिछले कई वर्षों के अपने रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए जलस्तर 64.690 मीटर तक जा पहुंचा।

        उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.530 मीटर, वर्ष 2021 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.680 मीटर, वर्ष 2022 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.390 मीटर और 2024 बाढ़ का उच्च जलस्तर  63.670रहा था।     

       बताते चलें कि गंगा का सामान्य जलस्तर  59.906 मीटर होता है। चेतावनी बिंदु 62.100 मीटर, खतरा बिन्दु 63.105 मीटर तथा बाढ़ का उच्च स्तर   65.220  मीटर निर्धारित है।

Views: 196

Advertisements

Leave a Reply