माफिया सरगना मुख्तार का बेटा फर्ज़ी हस्ताक्षर मामले में गिरफ्तार
गाजीपुर। आई एस 191 के पूर्व सरगना मरहूम मुख्तार अंसारी के पुत्र उमर अंसारी को अपनी मां के फर्जी हस्ताक्षर युक्त कागजात न्यायालय में दाखिल करना भारी पड़ गया। प्रकरण संज्ञान में आने पर कोतवाली मुहम्मदाबाद में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने उमर अंसारी को हिरासत में ले लिया।
उल्लेखनीय है कि पूर्व माफिया सरगना मरहूम मुख्तार अंसारी से संबंधित मामले में न्यायालय ने यूपी गैंगस्टर अधिनियम की धारा 14(1)के तहत संपत्ति जब्तीकरण की कार्यवाही की थी। उक्त जब्त संपत्ति सदर कोतवाली क्षेत्र में शहर के बीचोबीच मुहल्ला देवकी बल्लभ दास में स्थित एवं अत्यन्त कीमती है। वर्तमान में उक्त संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब दस करोड़ रुपए है।
उक्त संपत्ति के जब्तीकरण का आदेश दिनांक 06.12.2021 को तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा पुलिस रिपोर्ट के आधार पर किया गया था। पुनः आरोपी का प्रत्यावेदन सम्यक विचारोपरांत जिलाधिकारी द्वारा खारिज करते हुए फाइनल ऑर्डर 21.09.2023 को किया गया। उक्त ऑर्डर के विरुद्ध आरोपी माननीय न्यायालय की शरण में गया, लेकिन वहां से भी उसको राहत नहीं मिली और माननीय न्यायालय द्वारा उसका पक्ष गलत मानते हुए सरकार के पक्ष में उक्त संपत्ति निहित करने का आदेश दिनांक 11.03.2025 को किया गया।
इसके बावजूद उक्त संपत्ति को अवमुक्त कराने हेतु मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी द्वारा अवैधानिक लाभ लेने के उद्देश्य से सोची समझी रणनीति के तहत अपने वकील लियाकत अली से मिलकर अपनी मां आफ्सा अंसारी का फर्जी हस्ताक्षर करते हुए एक याचिका माननीय न्यायालय में दाखिल किया गया।
बताते चलें कि उमर अंसारी की मां और मरहूम माफिया सरगना मुख्तार अंसारी की बीबी आफ़्सा अंसारी वांछित अपराधी है और उस पर पचास हजार रुपए का इनाम भी घोषित है।
न्यायालय में दाखिल याचिका के सम्यक जांचोपरांत फर्जीवाड़ा संज्ञान में आया । इस संपत्ति को येन केन प्रकारेण हासिल करने के उद्देश्य से माननीय न्यायालय को भी भ्रम में रखने का प्रयास करते हुए उक्त फर्जीवाड़ा आरोपियों द्वारा किया गया है । इनके इस कृत्य से न्यायिक शुचिता भी प्रभावित हुई है ।
मामला संज्ञान में आते ही पुलिस सक्रिय हो गयी और कोतवाली मुहम्मदाबाद में अपराध संख्या 245/2025 अंतर्गत धारा 319(2), 318(4),338,336(3),340(2)बीएनएस पंजीकृत किया गया और पुलिस उमर अंसारी को हिरासत में लेकर आवश्यक पूछताछ के बाद विधिक कार्यवाही पूर्ण की।
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