पुलिस ने उड़ाई संविधान की धज्जियां,बिहार प्रांत से दुकानदार को उठाया

एसपी ने थानाध्यक्ष व चार आरक्षियों को किया निलम्बित 


गाजीपुर। बिहार प्रांत में बगैर अनुमति घुसकर पुलिसिया दबंगई और असंवैधानिक कार्रवाई करना आखिरकार गहमर थाना पुलिस पर भारी पड़ गयी। सीसीटीवी फुटेज और बिहार राज्य पुलिस की सूचना पर पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने बड़ी कार्यवाही करते हुए गहमर थाना प्रभारी अशेषनाथ सिंह सहित चार आरक्षी सिपाही मनोज दूबे, प्रमोद कुमार, शिवकुमार पाल और अमरजीत पाल को निलंबित कर दिया। गहमर थाना प्रभारी अशेषनाथ सिंह के स्थान पर भुड़कुड़ा थानाध्यक्ष शैलेश मिश्रा को गहमर थाने का प्रभार सौंपा है। पुलिस अधीक्षक की इस सख्त कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कम्प मचा हुआ है।

      बताया गया कि जिले के दिलदारनगर का एक युवक गत तीन वर्षों से बिहार प्रांत के भभुआ के रामगढ़ बाजार में सूर्य सरोवर के पास किराये के मकान में रहकर अपनी दुकान चलाता है। जब वह पोखरे के किनारे टहल रहा था, तभी सादे कपड़ों में गहमर थानाध्यक्ष अपने पुलिसकर्मियों उसे बातचीत के बहाने बीआरसी की दीवार के समीप बुलाया‌। उसके वहां पहुंचते ही पुलिस ने पहले से खड़ी सफेद गाड़ी में उसे जबरन बैठा लिया और गाड़ी लेकर फरार हो गये।

     फिल्मी स्टाइल से हुए इस अपहरण की जानकारी थोड़ी ही देर में भभुआ में फैल गई। इस घटना से हतप्रभ रामगढ़ थाने की पुलिस तत्काल एलर्ट मोड में आ गयी। वहीं गहमर थाना पुलिस टीम ने उसे चार घंटे तक अपने चंगुल में रखने के बाद चुपचाप छोड़ दिया। वहीं स्थानीय पुलिस ने वहां के सीसीटीवी फुटेज और गाड़ी की जानकारी ली तो मामला गाज़ीपुर पुलिस का निकला।     स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए बिहार पुलिस ने गाजीपुर के पुलिस कप्तान से सम्पर्क साधा और बगैर अनुमति के की गयी कार्रवाई की जानकारी चाही। विभागीय उच्चाधिकारियों को बगैर सूचित किए, बिना प्रशासनिक अनुमति और संवैधानिक प्रक्रिया अपनाये दूसरे राज्य में जाकर मनमानी करने पर कप्तान ने जब गहमर थाना प्रभारी से जवाब-तलब किया तो थानाध्यक्ष माकूल जबाब नहीं दे सके। थानाध्यक्ष ने बताया कि वह “दुकानदार हेरोइन तस्कर है।” लेकिन बिना अनुमति बिहार प्रांत में घुसने और  पकड़ने के बाद उसे छोड़ने के प्रश्न का जबाब नहीं दे सके। 

      गहमर थाना प्रभारी और चार आरक्षियों की भूमिका संदिग्ध पाये जाने और बगैर अनुमति दूसरे राज्य में घुसकर कार्रवाई करना गंभीर उल्लंघन माना गया और थानाध्यक्ष सहित चार आरक्षी निलम्बित कर दिए गये।

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