हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की ऐतिहासिक पदयात्रा संपन्न

साहित्यिक रचनाओं के विमोचन के साथ सम्पन्न हुआ साहित्य संगम समारोह


नई दिल्ली। हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी साहित्य के महारथियों ने भारत द्वार (इंडिया गेट) से राजघाट तक हिंदी राष्ट्रभाषा अभियान के तहत पदयात्रा निकाल कर सरकार से संविधान का त्रिभाषा सूत्र लागू करने एवं हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री एवं सांसदों से अपील की।
पदयात्रा के उपरान्त प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा,मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ करोलबाग नई दिल्ली में कवि संगम त्रिपाठी व डॉ०धर्म प्रकाश वाजपेयी द्वारा माँ सरस्वती के पूजन अर्चन के साथ हुआ। संयोजक डॉ०धर्म प्रकाश वाजपेयी ने अतिथियों व रचनाकारों को पुष्पगुच्छ व अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों ने कहा कि कहने को हिन्दी राष्ट्रभाषा है, लेकिन इसे पूरे देश में मूलरूप में स्वीकार नहीं किया गया और आज भी हिन्दी और हिन्दी के साहित्यकार अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। हिंदी दिवस के अवसर पर प्रति वर्ष 14 सितंबर को छोटे-मोटे कार्यक्रम कर सरकार से जुड़े लोग अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। वक्ताओं ने सभी साहित्यकारों से हिंदी के उत्थान और विकास के लिए तथा अपने हक के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का आग्रह किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वैश्विक हिंदी महासभा, अखिल भारतीय हिन्दी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विजयानन्द ने कहा कि हिंदी को आज तक उचित स्थान न मिलना चिंतनीय है। हिंदी को हर हाल में देश की राष्ट्रभाषा बन जाना चाहिए और संसद द्वारा संविधान का त्रिभाषा सूत्र लागू हो जाना चाहिए।
दिल्ली के प्रदीप मिश्र अजनबी के संचालन में अतिथियों ने हिंदी पर अपने विचार व्यक्त किए व उपस्थित कवियों ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विभिन्न साहित्यिक पुस्तकों का विमोचन किया गया। इसमें प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा की ऐतिहासिक स्मारिका प्रवर्तना, विनोद कुमार पांडेय,गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश की कृति “जीवन एक सफर”, डॉ०हरेंद्र हर्ष ,बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश का उपन्यास “शंखनाद”, हिमांशु पाठक युवा कवि, जिला गढ़वा ,झारखंड की कृति “काव्य तिलक”, रजनी सिंह ,डिबाई, उत्तर प्रदेश की कृति ” जिंदगी! वाह” और डा. विजयानन्द की 75 कविताएं संग्रह शामिल रहीं।
भारत द्वार (इंडिया गेट) से राजघाट तक हिंदी राष्ट्रभाषा अभियान पदयात्रा तथा कार्यक्रम में कवि संगम त्रिपाठी, संस्थापक अध्यक्ष- प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा, मध्य प्रदेश, डॉ० विजयानन्द, संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष- वैश्विक हिंदी महासभा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, राम लखन गुप्त, प्रांत अध्यक्ष -अखिल भारतीय हिंदी परिषद, चाकघाट, मध्य प्रदेश, राकेश तिवारी, राष्ट्रीय महामंत्री -हावड़ा पश्चिम बंगाल, ध्रुव यदुवंशी, बरेली, उत्तर प्रदेश, सत्यम सिंह नवयुग, कौशांबी, उत्तर प्रदेश, पूनम बागड़िया ,दिल्ली, रोहित कुमार ,दिल्ली, भारती, दिल्ली, कार्तिकेय मिश्र,प्रयागराज, आलोक दीक्षित नोएडा, हरगोविंद पाठक, बिसौली ,बदायूं, चन्द्रकान्ता चंद्रेश , सत्यार्थ जलालाबादी, सुरेन्द्र कुमार सिंह चांस,मऊ, उत्तर प्रदेश, विनोद कुमार पांडेय,ग्रेटर नोएडा, हेमंत जगदीश शर्मा, नोएडा, प्रबल प्रताप सिंह राणा ,नोएडा, मानव सिंह राणा सुओम ,अलीगढ़, कवि गोपाल जाटव विद्रोही, मंदसौर, कमलेश विष्णु सिंह जिज्ञासु , दिल्ली, डॉ० मिंटू शर्मा, मुजफ्फरपुर ,बिहार, डॉ०रजनी सिंह, डिबाई, उत्तर प्रदेश, डॉ० जया बंसल, डिबाई, उत्तर प्रदेश, पूजा संकल्प ,कुण्डा, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, पुनीता सिंह, शाहदरा ,दिल्ली, ऋतु अग्रवाल ,मेरठ ,उत्तर प्रदेश, राम गोपाल फरक्या, मंदसौर, मध्यप्रदेश, रामेश्वर पाटीदार, मंदसौर, मध्यप्रदेश, भोलेराम पाटीदार ,मंदसौर, मध्यप्रदेश, संजय त्यागी, मेरठ ,उत्तर प्रदेश, नरेन्द्र त्यागी नीर मेरठ, लक्की त्यागी , अभिषेक मिश्र, दिल्ली, तरुण तरंग वुराड़ी, माही मुन्तजर ,दिल्ली, डॉ०सुशील शैली, नोएडा, सुरेश बंजारा, नागपुर ,महाराष्ट्र, निखिलेश सिंह यादव, गोंदिया, महाराष्ट्र, लोकेश कौशिक, हरियाणा, सुमित राजौरा, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश,डॉ० उषा श्रीवास्तव, मुजफ्फरपुर व डॉ० अन्नपूर्णा श्रीवास्तव ,पटना, बिहार, डॉ०हरेंद्र हर्ष ,बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश, मंजू अग्निहोत्री ,कानपुर ,उत्तर प्रदेश, संतोष कुमार पाठक ,गढ़वा ,झारखंड ,राष्ट्रीय सचिव -हिंदी परिषद, डॉ० शिवशरण श्रीवास्तव अमल, बिलासपुर, छत्तीसगढ़, शुभम यादव, कुण्डा, प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेश, डॉ०गुंडाल विजय कुमार, हैदराबाद, तेलंगाना, श्रीकांत रेड्डी ,हैदराबाद, तेलंगाना उपस्थित रहे।

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