प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया – उच्च न्यायालय ने चेयरमैन एवं सचिव को जारी किया नोटिस

प्रयागराज। प्रेस काउंसिल के 14वें कार्यकाल के गठन हेतु चेयरमैन प्रेस काउंसिल ने बिना कानूनी अधिकार के अकेले ही नामिनेट कर दिया। इसी तरह सदस्यता चयन में भी धांधली को लेकर  याचिका दाखिल हुई है।
    उल्लेखनीय है कि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा अपने 14 वे कार्यकाल के गठन के लिए गत सात मार्च को देशभर के सभी पत्रकार संगठनों से सदस्यता के लिए अखबारों के विज्ञापन के माध्यम से विभिन्न कैटेगरी में सदस्यता के लिए आवेदन मांगा था। उसमें पत्रकार संगठन, एसोसिएशन, क्लब, संघ, यूनियन आदि ने अपना अपना दावा प्रस्तुत किया था। उपरोक्त सभी दावों को प्रेस काउंसिल आफ इंडिया ने अपने दिनांकित 07/04/21 की नोटिस मे कैटेगरी वॉइज सूची जारी कर दिया था।
     प्रेस काउंसिल के 14वें कार्यकाल के गठन के लिए चेयरमैन की अध्यक्षता में सदस्यों/ दावाकर्ताओं के बीच कई बैठके हुई और उसमें कार्यकारिणी ने जिस आवेदक के सदस्यता दावा को खारिज कर दिया था, जिसमें से कई को चेयरमैन प्रेस काउंसिल ने अकेले बिना कानूनी अधिकार के नामिनेट कर दिया। इसी तरह सदस्यता चयन में कई प्रकार से कई लोगों के साथ धांधली की गई है।
        ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकान्त शास्त्री ने उपरोक्त धांधली के खिलाफ उक्त कार्यकारिणी में हुए गैर कानूनी चुनाव को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जिसमें याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी के तर्क को सुनकर गत 27 सितम्बर को इलाहाबाद हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मुनेश्वर नाथ भंडारी एवं न्यायमूर्ति पियूष अग्रवाल जी ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन व सचिव को नोटिस जारी कर चार सप्ताह मे जवाब मांगा है।


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