कवि अन्वेषी की नयी रचना – क्या भेजें क्या बात करें हम

क्या भेजें क्या बात करें हम ।
कैसे अब संग्राम करें हम ।।
अपने ही हो गए पराए ।
किसका चक्का जाम करें हम ।।


इनका हर व्यवहार देखकर ।
जी करता विश्राम करें हम।।
बोलेंगे बदनामी होगी ।
क्यों इतना बदनाम करें हम ।।

नादानी तो देख चुके हैं ।
अब कैसे क्या काम करें हम ।।
उदासीन होना मुश्किल है ।
कैसे काम तमाम करें हम ।।

थके नहीं हैं मन कहता है ।
थोड़ा तो आराम करें हम ।।
सोच रहे हैं कई दिनों से ।
अब थोड़ा व्यायाम करें हम।।

पर्वत को समतल करना है ।
यही नया अब काम करें हम ।।
जब समानता आ जाएगी ।
तब तो चारों धाम करें हम ।।

संविधान को सर पर रख कर ।
दौड़ें और सलाम करें हम ।।
सब कुछ तो काला काला है ।
किस सफेद को श्याम करें हम ।।

युद्ध अभी तो शुरू हुआ है ।
कैसे युद्ध विराम करें हम।।
भगत सिंह तो चले गए अब ।
किसका जग में नाम करें हम।।

क्या भेजें क्या बात करें हम ।
कैसे अब संग्राम करें हम ।। अन्वेषी 16 9 21

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