केन्द्र सरकार नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु पूर्णतः कटिबद्ध

वाराणसी। कृष्ण सुदामा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के चेयरमैन एवं भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश मंत्री डॉ0विजय यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की सरकार पूरी गंभीरता से किसानों के कल्याण एवं उनकी भलाई के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विगत छः वर्षों में किसानों की भलाई के जितने काम मोदी सरकार ने किये हैं, उतने किसी और ने नहीं किये। वहीं सरकार देश के हर नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए पूर्णतः कटिबद्ध है।
डॉ0 विजय यादव ने कहा कि हम माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को स्वीकार करते हैं। देश देख रहा है कि हमारी नीयत पहले भी साफ़ थी और आने वाले दिनों में भी हम इसी दृष्टिकोण से किसानों की भलाई के लिए काम करते रहेंगे। हम आशा करते हैं कि आंदोलनरत किसान संगठन भी शीर्ष अदालत के इस निर्णय को स्वीकार करेंगे। केन्द्र सरकार शीर्ष अदालत के निर्णय की कॉपी आने के बाद इसका विस्तृत अध्ययन कर इस पर वक्तव्य देंगी।
उन्होंने कहा कि सरकार पहले दिन से यह कह रही थी कि वार्ता से ही इस मुद्दे का समाधान हो सकता है। सरकार चाहती थी कि किसान संगठन बिंदुवार चर्चा कर जहां भी उचित संशोधन की जरूरत हो, उसे प्रस्तावित करें और हम उस पर अमल करने को तैयार है। सरकार ने किसान संगठनों से बैठक में कई बार यह आग्रह किया था कि कोविड के कारण महिलाओं और बच्चों को इस आंदोलन से घर भेज दिया जायें।
सरकार ने किसान संगठनों से अपील करते हुए कहा था कि आप हाइवे को छोड़ कर अन्य वैकल्पिक जगहों पर अपना आंदोलन जारी रखें। किसान संगठनों को प्रदर्शन के लिए सरकार ने वैकल्पिक जगह भी मुहैया कराई थी। गृह मंत्री ने स्वयं किसान संगठनों से बात की थी। शीर्ष अदालत ने आंदोलनरत किसान संगठनों से यही कहा कि सरकार ने किसान संगठनों से 9 दौर की वार्ता की। हर वार्ता में सरकार ने यह सीधा संदेश दिया कि हर बिंदु पर सरकार चर्चा करने को तैयार है। कई मुद्दों पर सरकार ने किसान संगठनों की बात मानी भी लेकिन किसान संगठन क़ानून रद्द करने की मांग पर अड़े रहे। किसान संगठनों के साथ वार्ता सकारात्मक रही लेकिन विपक्ष और कुछ संगठनों ने अपने एजेंडे के तहत किसान संगठनों को गुमराह किया जिससे एक-दो बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई। लोकतंत्र में सबको धरना, प्रदर्शन देने और असहमति का अधिकार है लेकिन हिंसा, पथराव और अराजकता की स्थिति नहीं होनी चाहिए। सरकार ने कई बार आशंका जताई और किसान संगठनों को भी आगाह किया इसमें असमाजिक तत्व शामिल हो गए हैं।क़ानून- व्यवस्था को लेकर जो चिंता केंद्र सरकार ने जाहिर की थी, वहीं चिंता शीर्ष अदालत ने भी जाहिर की है।


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