कवि हौसिला अन्वेषी की दो नवीन रचनाएं

संकट काल हटाना होगा ।
अपना देश बचाना होगा ।।
चेहरों पर हरियाली लाकर ।
मधुर मधुर मुसकाना होगा ।।


इस जालिम से उस जालिम तक ।
सबको मार भगाना होगा । ।
पूँजी के सारे जंगल को ।
जल्दी काट गिराना होगा ।।

लोगों में खुशहाली लाकर ।
सबका मन बहलाना होगा ।।
जीवन का संग्राम जीतकर ।
जीवन सफल बनाना होगा ।।

अपने भारत के आँगन में ।
खुशियाँ रोज उगाना होगा ।।
भाईचारा मन में लेकर ।
सबको गले लगाना होगा ।।

जो भी नफरत को बोता है।
उसको जल्द हटाना होगा ।।
भूखे प्यासे धन कुबेर को ।
संयम जरा पढ़ाना होगा ।।

नेता जी के दिल दिमाग में ।
देश प्रेम बैठाना होगा ।।
नैतिक मूल्यों के गिरने से ।
हरदम हमें बचाना होगा ।।


सफेद झूठ के
इस अलौकिक दौर में,
सत्य पर
होता प्रहार देखकर
कुछ भारतीय किस्म के
अभारतीय,
जो न
सोच सकते हैं,
न समझ सकते हैं
और न बोल सकते हैं।
वे सिर्फ
हँस सकते हैं,
क्रूर हँसी
आत्मसंयम खोकर ।
और दे सकते हैं
बढ़ावा
झूठ को
बेलौस बोलकर ।।
…. अन्वेषी ………

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