जालियांवाला ! अमर शहीदों को नमन

मानवीय आजादी की लड़ाई
लड़ी गई
लड़ी जा रही है,
लड़ी जाती रहेगी,
जब तक अमानवीयता का
एक भी कतरा
शेष है
इस धरती पर ।
लड़ाई के ठहर जाने पर
पनप जाती है
अमानवीयता,
जैसे आज
आलम यह है कि
हम
अनजाने में ही सही
अमानवीयता को ही
मान बैठे हैं
मानवीय।
और मानते चले जा रहे हैं
अमानवीय आदेश
मानवीय कहकर ।
इस विहंगम मोड़ पर
सामने खड़ा
अमानवीयता का इतिहास
जो लड़ा जा चुका है
अतीत में
मानवीय आजादी के लिए,
देता है
सीधा रास्ता
मानवीय लड़ाई का
अविचल ।।


कवि – हौसिला अन्वेषी

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