कवि हौसिला अन्वेषी की रचना ….कोरोना इतिहास लिख रहा
कोरोना इतिहास लिख रहा ।
शायद नया विकास लिख रहा । ।
शोषण के सारे दर्शन का।
लगता सत्यानाश लिख रहा ।।
मानवता के हर दुश्मन का।
हम कहते परिहास लिख रहा ।।
आज उदारीकरण रो रहा ।
उसका पर्दाफास लिख रहा ।।
संरक्षण की बात चल रही।
आहट औ आभास लिख रहा ।।
संकेतों से खबर आ रही।
धरती को नापास लिख रहा ।।
बदलेगा यह देश हमारा ।
यह तो खासमखास लिख रहा ।।
सब कहते हैं कई दिनों से ।
वह नूतन इतिहास लिख रहा।।
पूँजीपति हैं जानेवाले ।
यही आश विश्वास लिख रहा ।।
इतराने वाले लोगों को ।
वह मेहनत का दास लिख रहा ।।
दुख में डूबा आज कोरोना ।
पागलपन का नाश लिख रहा ।।
पूँजीपतियों के जीवन का ।
लगता है संन्यास लिख रहा ।।
.. अन्वेषी
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