कविता ! हौसिला अन्वेषी की रचना
हिंदू मुश्लिम गाना छोड़ो,
नफरत को फैलाना छोड़ो।
किसी तरह आजाद हुए हैं,
नई गुलामी लाना छोड़ो ।।
देखो कितना कर्ज चढ़ा है,
बेमतलब बतियाना छोड़ो ।
संविधान को अच्छा समझो,
मूरख हमें बनाना छोड़ो ।।
प्रवचन भाषण आश्वासन सब,
भारत में फैलाना छोड़ो ।
कर्म योग औ ज्ञान योग में,
तिकड़म रोज भिड़ाना छोड़ो ।।
पूँजीपतियों के हित में ही,
सारी शक्ति लगाना छोड़ो ।
जन विरोध का सारा चिंतन,
मन में बिल्कुल लाना छोड़ो ।।
मानवता को मार रहे हो,
ऐसी अकल लगाना छोड़ो।
सच्चाई से काम करो तुम,
पागलपन फैलाना छोड़ो ।।
मेहमानों को यहाँ बुलाकर ,
मेरा देश लुटाना छोड़ो ।
अब तो समय यही कहता है,
गलत राह पर जाना छोड़ो ।।
आज कोरोना बोल रहा है,
बाहर भीतर जाना छोड़ो ।
अपने भारत में भारत का,
दुश्मन रोज बुलाना छोड़ो ।।
अन्वेषी
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