कविता ! ” गुरू वही कहलाता है”

” गुरू वही कहलाता है”


जब जब छाए घोर अंधेरा,
बन कर प्रकाश वह आता है।
हर लेता है तम को पल में,
जीवन में अलख जगाता है।

तज कर अपने सब सुखों को,
सद्मार्ग हमें दिखलाता है।
जिसमें है संचित ज्ञान सुधा,
बस गुरु वही कहलाता है।

जब भी तम छाता जीवन में,
हिम्मत जबाब दे देती है।
धूमिल हो जाती सब आशाएं,
वह नई राह दिखलाता है।

मन होता है जब भी विचलित,
हालात हमें भटकाते हैं।
जो थाम ले वलगा ज्ञान रुपी
बस गुरु वही कहलाता है।

अज्ञान को जो दूर भगाए,
हमको नई पहचान दिलाए।
जब भी हावी हो नीरसता,
बन कर ‘कृष्ण’ उर्जा भर दे।

जो चले सदा ही सत्य मार्ग पर,
बन जाए सभी का भाग्य विधाता।
अहंकार तज दिल में बस जाए,
बस गुरु वही कहलाता है।
बस गुरु वही कहलाता है।।

   कवि - अशोक राय वत्स
    रैनी (मऊ)  उत्तरप्रदेश
      मो. 8619668341

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