फर्जी आईकार्ड बनाने वाले गिरोह पर संगठन ने शुरू की कानूनी कार्रवाई
पत्रकारिता की साख पर हमला बर्दाश्त नहीं – अनुराग सक्सेना
गाजीपुर। पत्रकार हितार्थ राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत जर्नलिस्ट काउन्सिल ऑफ इंडिया की बढ़ती साख से प्रभावित होकर इसके नाम का दुरुपयोग कर फर्जी परिचय पत्र तैयार कर प्रसारित करने का मामला सामने आया है।
संगठन के राष्ट्रीय सलाहकार डॉ.ए. के.राय ने इसे पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि जेसीआई ने गंभीरता से लिया है।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के एक पत्रकार ने संगठन के आधिकारिक व्हाट्सएप समूह से जुड़ने का आग्रह किया। सदस्यता सत्यापन के दौरान उनके पास मौजूद संगठन का परिचय पत्र संदिग्ध मिलने पर मामले की जांच प्रदेश स्तर पर की गयी तो पता चला कि उसका परिचय पत्र जाली था। पूछताछ के दौरान संबंधित पत्रकार ने झारखंड से जुड़े एक मोबाइल नंबर और एक ई-मेल आईडी की जानकारी उपलब्ध कराई, जिसके माध्यम से कथित तौर पर वह फर्जी परिचय पत्र भेजा गया था।
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले कि संगठन के आईकार्ड पर अशोक की लॉट का प्रयोग किया गया जो कि इम्वलम एक्ट का दुरुपयोग और गंभीर मामला है। इससे यह साबित होता है कि कुछ फर्जी लोग संगठित तरीके से जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (रजि.) के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर रहे हैं। संगठन की आईटी टीम डिजिटल साक्ष्यों को एकत्र कर तकनीकी विश्लेषण में जुटी हुई है।
, संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुराग सक्सेना ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व संगठन के नाम और प्रतिष्ठा का दुरुपयोग कर पत्रकारिता की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके विरुद्ध संगठन के विधिक सलाहकारों, जिनमें विभिन्न उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं, से परामर्श लिया जा रहा है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित एजेंसियों और साइबर सेल के समक्ष मामला दर्ज कराकर दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
उक्त प्रकरण की जानकारी देते हुए संगठन के राष्ट्रीय सलाहकार डा. ए.के. राय ने देशभर के पत्रकारों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा आम नागरिकों को आगाह किया है कि सामने आया आईकार्ड पूरी तरह फर्जी और निराधार है और उसका संगठन से कोई संबंध नहीं है। ऐसे किसी भी फर्जी पहचान पत्र का उपयोग करने वाले व्यक्ति उसके प्रयोग हेतु स्वयं जिम्मेदार होगा।
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